उदयपुर के मंदिर की पूरी जानकारी Udaipur Temples

हेलो दोस्तों आज हम राजस्थान के उदयपुर जिले के प्रमुख मंदिरो के बारे में जानेगे उदयपुर के मंदिर में कुछ प्रमुख मंदिर है जेसे —

उदयपुर के मंदिर की सूचि Udaipur Temples in hindi

  1. एकलिंग जी का मंदिर
  2. अम्बिका देवी का मंदिर
  3. सास-बहू का मंदिर, नागदा 
  4. जगदीश मंदिर
  5. स्कंध कार्तिकेय मंदिर 
  6. जावर का विष्णु मंदिर
  • एकलिंग जी का मंदिर उदयपुर ( Ekling ji’s temple Udaipur ) –

उदयपुर के मंदिर उत्तर में स्थित नागदा (कैलाशपुरी) पर एकलिंगजी का प्रसिद्ध शिव मंदिर है ! एकलिंग जी मेवाड़ के महाराणाओं के इष्टदेव व कुल देवता है ! महाराणा इन्हें ही मेवाड़ राज्य का वास्तविक शासक मानते थे तथा स्वयं को उनका दीवान कहलाना पसंद करते थे ! इस मंदिर का निर्माण बप्पा रावल ने करवाया था ! मुसलमानों द्वारा नष्ट किए जाने के बाद राणा मोकल ने इसका जोर्णोद्धार करवाया ! मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग पर चार मुख बने हुए हैं ! इनमें से पूर्व के मुख को सूर्य, उत्तर के मुख को ब्रह्मा, दक्षिण  के मुख को शिव तथा पश्चिम के मुख को विष्णु माना जाता है !

यह मंदिर राज्य में पाशुपात सम्प्रदाय का सबसे प्रमुख स्थल भी है !

  • अम्बिका देवी का मंदिर ( Ambika Devi Temple Udaipur ) –

उदयपुर मंदिर में स्थित अम्बिका देवी के मंदिर में नृत्य करते हुए गणेशजी की विशाल प्रतिमा स्थापित है ! इस मंदिर को ‘मेवाड़ का खजुराहो’ कहते हैं !

  • सास-बहू का मंदिर, नागदा उदयपुर ( Saas-Bahu Ka Mandir, Nagda Udaipur ) –

मेवाड़ की प्राचीन राजधानी नागदा में स्थित मंदिर मूलतः ‘सहस्त्रबाहु’ (भगवान विष्णु) का है, लेकिन अपभ्रंश होते-होते इसका नाम ‘सास-बहू का मंदिर’ हो गया ! यह मंदिर सोलंकी व महामारू शैली में निर्मित है ! इनमें से बड़ा मंदिर (सास का मंदिर) दस सहायक देव मंदिरों से घिरा हुआ है, जबकि छोटा मंदिर (बहु का मंदिर) पंचायतन प्रकार का है !

  • उदयपुर में जगदीश मंदिर ( Jagdish Temple in Udaipur ) –

इस मंदिर का निर्माण महाराणा जगतसिंह प्रथम ने 1651 ई. में उदयपुर में स्थित सिटी पैलेस के नजदीक पिछोला झील के किनारे करवाया था ! मंदिर में भगवान जगदीश की काले पत्थर से निर्मित 60 इंच (5 फुट) ऊँची प्रतिमा है ! मंदिर के चारों कोनों में शिव-पार्वती, गणपति, सूर्य तथा देवी के चार लघु मंदिर तथा गर्भगृह के सामने गरूड की विशाल प्रतिमा है !

यह गरूड की प्रतिमा विश्व की सर्वश्रेष्ठ प्रतिमा कही जाती है ! पुरी के जगन्नाथ जी भगवान की तरह से यहाँ भी जगदीश भगवान की पूजा की जाती है ! इस मंदिर के शिल्पकार अर्जुन, भाषा एवं मुकुंद है !

मंदिर के गर्भगृह में स्थित मूर्ति किसी भी शिल्पकार के द्वारा बनायी हुई नहीं है ! बल्कि भगवान जगन्नाथ ने स्वप्न में प्रकट होकर महाराणा से कहा, कि मेरी मूर्ति डूंगरपुर के पास शर्वा गाँव के पीपल के पेड़ के नीचे हाथ खुदाई पर मिलेगी ! इसलिए इसे ‘सपने से बना मंदिर’ कहा जाता है !

औरंगजेब के आक्रमण के समय इस ऐतिहासिक मंदिर को नष्ट होने से बचाने के लिए ! ‘नारू जी बारहट’ ने अपने बीस साथियों सहित बहादुरी से मुकाबला कर प्राणोत्सर्ग किए !

  • स्कंध कार्तिकेय मंदिर उदयपुर ( Skandha Kartikeya Temple Udaipur ) –

तनेसर (उदयपुर) में देव सेना के अधीपति स्कंध एवं शिवजी के पुत्र कार्तिकेय का मंदिर स्थित है ! जिसका निर्माण छठी शताब्दी (गुप्तोतर काल) में किया गया। मेवाड़ का अमरनाथ, गुप्तेश्वर मंदिर-उदयपुर जिला मुख्यालय से 10 किमी. दूर तीतरड़ी-एकलिंगपुरा के बीच ! हाड़ा पर्वत स्थित गुप्तेश्वर महादेव का मंदिर है ! जो गिरवा के अमरनाथ के नाम से जाना जाता है ! इसको ‘मेवाड़ का अमरनाथ’ भी कहा जाता है !

  • जावर का विष्णु मंदिर उदयपुर के मंदिर ( Jawar’s Vishnu Temple Udaipur’s Temple ) –

जावर (उदयपुर) में रमानाथ कुंड और भगवान विष्णु के इस मंदिर का निर्माण रमाबाई द्वारा करवाया गया था ! मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा की पुत्री रमाबाई का विवाह जूनागढ़ (गुजरात) के मंडलीक यादवराज से हुआ था ! किंतु वहाँ महमूद बेगड़ा के आक्रमण के बाद धर्म परिवर्तन का दौर चला तो रमाबाई मेवाड़ आ गईं ! वह गुजरात में उन दिनों चले भक्ति आन्दोलन से प्रभावित होकर वैष्णव हो गई थी ! रमाबाई के आग्रह पर तत्कालीन शिल्पी सूत्रधार ईश्वर ने शास्त्रों का शोधन कर यहाँ पंचायतन शैली के इस मंदिर की नींव रखी !


अन्य टोपिक:-

भटनेर दुर्ग हनुमानगढ़ का इतिहास Bhatner Fort

रणथम्भौर दुर्ग का इतिहास Ranthambore Fort

अहिछत्रपुर दुर्ग नागौर की पूरी जानकारी Nagaur Fort

मेहरानगढ़ किले की पूरी जानकारी । Mehrangarh Fort

Question bank