कोशवर्द्धन दुर्ग शेरगढ़ की पूरी जानकारी Koshvardhan Fort

हेलो दोस्तों आज हम राजस्थान के बांरा जिले में स्थित कोशवर्द्धन दुर्ग शेरगढ़ दुर्ग के बारे में विस्तार से जानेगे

कोशवर्द्धन दुर्ग शेरगढ़ का परिचय Introduction of Koshvardhan Durg Shergarh hindi

  • दुर्ग का नाम – कोशवर्द्धन दुर्ग शेरगढ़ किला Shergarh Fort
  • दुर्ग का सर्वप्रथम नाम – कोशवर्द्धन दुर्ग
  • निर्माण – ऐसा माना जाता है की ईस दुर्ग का निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया !
  • कब हुआ निर्माण – 711 ई. में
  • प्रवेश दरवाजा – बरखेड़ी दरवाजा
  • नदी का नाम जहा दुर्ग स्थित है – परवन नदी के किनारे पर
  • पहाडी का नाम – कोशवर्द्धन पहाडी !
  • जिला – बांरा
  • राज्य – राजस्थान ( भारत )

कोशवर्द्धन दुर्ग शेरगढ़ का इतिहास Koshvardhan Durg Shergarh history in hindi

कोशवर्द्धन दुर्ग शेरगढ़ हाड़ौती केअंचल बारां जिले में परवन नदी के किनारे यह दुर्ग स्थित है ! शेरशाह सूरी के नाम पर इसका नाम शेरगढ़ रखा  गया ! इससे पहले इसका नाम कोशवर्द्धन था ! जो इसकी पर्वत चोटी के कोशवर्द्धन नाम के कारण रखा गया था ! बारां जिले का यह भव्य और सुदृढ़ दुर्ग कब व किसने बनाया इस बारे में प्रमाणिक जानकारी का अभाव है ! कोशवर्द्धन दुर्ग के निर्माण संबंधी सबसे पुराना साक्ष्य इस दुर्ग के एक प्रवेश द्वार (बरखेड़ी दरवाजा) पर उत्कीर्ण विक्रम संवत् माघ सुदी6 (15 जनवरी,791 ई.) का एक शिलालेख है ! जिसके अनुसार यहाँ पर चार नागवंशीय शासकों (बिंदुनाग, पदम्नाग, सर्वनाग और देवदत्त) ने राज किया और जिस पर्वत पर यह दुर्ग बना है उसका नाम कोशवर्द्धन था !

इससे हम अनुमान लगा सकते हैं कि इस दुर्ग का निर्माण नागवंशीय शासकों के द्वारा करवाया गया था ! और इसी पर्वत के नाम पर इस दुर्ग का नाम कोशवर्द्धन दुर्ग रखा गया !

इतिहास के अनुसार कोशवर्द्धन दुर्ग राजकोष में निरंतर वृद्धि करने वाला दुर्ग था ! इसी के कारण इसका दुर्ग का नाम कोशवर्द्धन (प्राचीन नाम) रखा गया ! यह राजस्थान में मात्र एक दुर्ग है जहाँ सर्वनाग और उसकी रानी श्री देवी के पुत्र देवदत्त द्वारा एक बौद्ध विहार और मठ बनवाया !

शेरशाह सूरी – Sher Shah Suri

यह बारां जिले में परवन नदी के किनारे स्थित ‘जल दुर्ग’ व ‘वन दुर्ग’ की श्रेणी में आता है ! जब शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को परास्त कर दिल्ली का बादशाह बना तो उसने 1542 ई. में अपने मालवा अभियान के समय कोशवर्द्धन दुर्ग को जीतकर ! उसका जीर्णोद्धार करवाकर उसका नाम अपने नाम पर शेरगढ़ दुर्ग रख दिया ! कोटा के महाराव उम्मेद सिंह के दिवान जालिम सिंह झाला ने अपने रहने के लिए विशाल एवं कलात्मक भवन का निर्माण करवाया !

वह आज भी झालाओं की हवेली के नाम से प्रसिद्ध है ! जालिमसिंह व अमीर खाँ पिण्डारी दोनों के मध्य पगड़ी बदले भाई के संबंध थे ! अमीर खाँ अंग्रेजों से बचने के लिए अपनी तीन बेगमों व माता सहित शेरगढ़ दुर्ग के भीतर आश्रय लिया था !

  • दर्शनीय स्थल –

इस दुर्ग में सोमनाथ महादेव, लक्ष्मीनारायण मंदिर, दुर्गा माता का मंदिर, प्राचीन बावड़ी, झालाओं की हवेली, अमीर खाँ के महल आदि दर्शनीय स्थल हैं !

वराहनगरी के नाम से प्रसिद्ध बांरा Banra durg in hindi

कोशवर्द्धन दुर्ग शेरगढ़ पुराने समय में बाराँ भगवान विष्णु के वराह अवतार के रूप कारण ‘वराहनगरी’ के नाम से प्रसिद्ध रहा है ! यहाँ 15वीं सदी से पहले राजपूतों का शासन था स्वतंत्रता के बाद में राजस्थान के गठन (30 मार्च, 1949) के बाद यह कोटा जिले में पूर्ण रूप से शामिल किया गया !

10 अप्रैल, 1991 को कोटा से अलग कर बारा जिले का गठन किया गया ! राजस्थान के बाराँ के बीचो बीच से पार्वती की सहायक बाणगंगा नदी बहती रहती है ! बारा जिले में सहरिया जाति सबसे अधिक मानी जाती है ! भारत के स्वतंत्र होने से पहले बारां के छबड़ा क्षेत्र में टोंक रियासत का एक परमुख भाग रहा था !


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