चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर Chittorgarh Temple

नमस्कार दोस्तों आज हम राजस्थान राज्य के चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर की बारे में विस्तार से जानेगे 
  • बाड़ोली का शिव मंदिर चित्तौड़गढ़
  • मीरा बाई का मंदिर चित्तौड़गढ़
  • समिद्धेश्वर महादेव मंदिर चित्तौड़गढ़
  • सांवलिया सेठ का मंदिर चित्तौडगढ़
  • कुंभ श्याम मंदिर चित्तौड़गढ़
  • कालिका माता का मंदिर, चित्तौड़गढ़
  • मातृकुंडिया, चित्तौड़गढ़
  • श्रृंगार चंवरी, चित्तौड़गढ़ दुर्ग
  • अट्बुदजी का मन्दिर चित्तौड़गढ़
  • अन्य मंदिर चित्तौड़गढ़

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में बाड़ोली का शिव मंदिर Chittorgarh Temple in hindi

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में बाड़ोली का प्रसिद्ध आठवीं शताब्दी में निर्मित शिव मंदिर चित्तौड़गढ़ जिले भैसरोड़गढ़ कस्बे के पास स्थित है ! इन मंदिरों पर गुप्तोत्तर कालीन स्थापत्य की स्पष्ट छाप है ! बाडोली का मुख्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जो घाटेश्वर महादेव कहलाता है ! परंतु इस मंदिर से विष्णु के वामन अवतार की प्राचीन मूर्ति मिली है ! इस मंदिर का निर्माण परमार शासक हुण द्वारा अपनी प्रेयसी को चिर स्थाई बनाए रखने के लिए करवाया था !

मीरा बाई का मंदिर चित्तौड़गढ़ (Mira Bai’s Temple Chittorgarh)

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में मीरां बाई का मंदिर कुंभ श्याम मंदिर के पास में चित्तौड़गढ़ दुर्ग में बना हुआ है ! इस मंदिर का निर्माण महाराणा सांगा ने अपनी पुत्र वधू मीरां की भक्ति के लिए महल के रूप में करवाया था ! इसमें स्थापित मूर्ति भगवान कृष्ण की काले
पत्थर से निर्मित यह मंदिर इंडो-आर्य शैली से बना हुआ है ! मंदिर के सामने मीरा के गुरु रैदास की छतरी स्थित है !
  • समिद्धेश्वर महादेव मंदिर चित्तौड़गढ़ ( Chittorgarh mandir)
मध्य काल में पूर्ण विकसित परमार मूर्तिकला का चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में यह एकमात्र उदाहरण है ! और इस मंदिर का निर्माण मालवा के पराक्रमी परमार नरेश राजा भोज (1011-55 ई.) ने करवाया था ! जिसकी पुष्टि मंदिर में स्थापित सन् 1150 ई. के कुमारपाल के शिलालेख से होती है ! एक अन्य शिलालेख (सन् 1428 ई.का) से यह ज्ञात होता है, ! कि महाराणा मोकल ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था इसी कारण इस मंदिर को मोकल जी का मंदिर भी कहा जाता है !
  • सांवलिया सेठ का मंदिर चित्तौडगढ़ 
चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में श्री सांवलिया जी सेठ का मंदिर मंडपिया गाँव (चित्तौडगढ़) में स्थित है ! जिसे ‘अफीम मंदिर’ के नाम से जानते हैं इस मंदिर में श्री कृष्ण भगवान की काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है ! यहाँ जल झूलनी एकादशी को विशाल मेला भरता है !

कुंभ श्याम मंदिर चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर (Kumbh Shyam Temple Major Temples of Chittorgarh)

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में कुंभ श्याम का मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है ! यह मंदिर मूल रूप से सूर्य मंदिर था ! लेकिन मलेच्छों द्वारा मंदिर को नष्ट करने के कारण 1449 ई. में मेवाड़ के महराणा कुंभा ने ! अपने इष्ट देव भगवान विष्णु के वराह अवतार की मूर्ति को स्थापित कराकर इसका जिर्णोद्धार करवाया ! लेकिन कुंभा द्वारा अपने आराध्य की मूर्ति इसमें स्थापित करवाए जाने कारण यह मंदिर ! कुंभ श्याम मंदिर के नाम से जाने जाने लगा  यह मंदिर इण्डो-आर्यन स्थापत्य कला का एक सुंदर नमूना है !

इस मंदिर के अंदर गर्भ ग्रह , श्रृंगार चंवरी, अर्धमंडप सभा मंडप आदि भाग है ! उत्तंराग पट के उपर बहुत सुंदर अलंकरण हैं सभा मंडप के अंदर 20 स्तंभ है ! इस मंदिर में कई पाषाण प्रतिमाएं महाराणा कुंभा ने कराई जिसमे से रोहिणी -दामोदर माधव-तुलसी ,कृष्ण- रुकमणी, राम -लक्ष्मण ! और कृष्ण -लीला के फलक, जो की यहां पर रिक्ततालियों में स्थापित किए गए हैं ! यह निश्चित रूप से कुंभा कालीन है इसका प्रमाण मूर्तियों की नवीनतम शैली व उन पर अंकित अभिलेखों से प्राप्त होता है !

कालिका माता का मंदिर चित्तौड़गढ़ (Kalika Mata Temple Chittorgarh)

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में कलिका माता का मन्दिर मूल रुप से सूर्य मन्दिर था ! राजस्थान में सूर्य को समर्पित प्राचीनतम मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में है ! इस मंदिर का निर्माण मौर्य वंशी राजामान ने 713 ई. में करवाया था ! मुगल आक्रमणों के कारण मंदिर को नष्ट करने के बाद ! महाराणा सज्जन सिंहजी ने इसके गर्भगृह में कालिका माता की मूर्ति स्थापित करवाई ! जो वर्तमान में अब कालिका माता के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है ! और मंदिर में देवी की मूर्ति प्रतिष्ठपित है, किन्तु प्रमुख भागों में सूर्य प्रतिमाओं की उपस्थिति से इसका सूर्य मंदिर होना प्रमाणित होता है ! राज्य में विष्णु के कूर्मावतार का सर्वाधिक प्राचीन अंक ने इसी माता के मंदिर से ही प्राप्त होता है ! यह चित्तौड़गढ़ के मंदिर में महवपूर्ण माना जाता है !
  • मातृकुंडिया  चित्तौड़गढ़
चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में मातृकुंडिया (राशमी पंचायत समिति) चित्तौड़गढ़ में चंद्रभागा नदी के किनारे स्थित ! मातृकुंडिया तीर्थ स्थल राजस्थान का हरिद्वार के नाम से जाना जाता है ! क्योंकि यहाँ पर स्थित कुंड के पवित्र जल में मृत व्यक्ति की अस्थियाँ विसर्जित की जाती है ! तथा हरिद्वार की तरह यहाँ पर भी लक्ष्मण झूला लगा हुआ है !

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में श्रृंगार चंवरी चित्तौड़गढ़ दुर्ग दर्सनिय है

चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर बनवीर की दीवार के बीच के भाग में राजपूत और जैन स्थापत्य कला के समन्वय का एक अनूठा नमूना है ! श्रृंगार चंवरी के नाम से प्रसिद्ध है इसकी वेदी के उपर 4 खंभों वाली छतरी भी बनी हुई है ! यह माना जाता है कि यह महाराणा कुंभा की राजकुमारी के विवाह के समय की चंवरी है ! और पाणीग्रहण संस्कार का स्थल है इसलिए इस को श्रृंगार चंवरी नाम से ही जानी जाती है और यह मिल रूप से शांतिनाथ जैन मंदिर है  ! जो की चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में से एक है !
  • अट्बुदजी का मन्दिर चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर 
कीर्ति-स्तम्भ की और जाने वाली मुख्य सड़क के पश्चिमी किनारे की और जीर्ण-शीर्ण अवस्था में बना हुआ एक शिवालय है ! जिसमें शिवलिंग के पीछे भगवान श्वि की एक विशाल त्रिमूर्ति है ! जिसका निर्माण 1483 ई. में राणा रायमल के शासन काल में करवाया गया !

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में अन्य मंदिर यह है (Other Temples in Chittorgarh)

चित्तौड़गढ़ के प्रमुख मंदिर में सतबीस देवरी जैन मंदिर चित्तौड़गढ़ ,महानालेश्वर (नीलकंठेश्वर ) मंदिर- मेनाल,सप्त मातृका मंदिर -बाडोंली ,भंवर माता ,आवरी माता चित्तौड़गढ़ यह सब अन्य मंदिर है ! दोस्तों अगर आप कभी चित्तौड़गढ़ में जाते है तो इन मंदिरों का दर्सन जरुर करे !

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