जसनाथ जी महाराज का जीवन परिचय – जसनाथी संप्रदाय

jasnath ji maharaj दोस्तों आज हमारी पोस्ट में आपको जसनाथ जी महाराज के बारे में बताएंगे जो कि जसनाथी संप्रदाय से आते हैं ! वैसे जसनाथ जी महाराज के बारे में ऐसी कई रोमांचक और आश्चर्यचकित कहानियां भी हैं जो कि हकीकत भी थी ! इनके बारे में जानकर आपको बहुत अच्छा लगेगा और आप अपने आप पर गर्व करोगे कि हम उस संस्कृति से आते हैं ! जहां पर इतने महान संत महाराज रहते थे और अब इस पावन धरा पर हम निवास करते हैं ! साथियों तो अब बात करते हैं जसनाथ जी महाराज की इसके लिए आगे हमारी इस पोस्ट को ध्यान से पढ़िए !

जसनाथ जी महाराज का परिचय (jasnath ji maharaj biography in hindi)

  • जसनाथजी (जसनाथी संप्रदाय)
  • जसनाथ जी का जन्म 1482 ई. (विक्रम संवत् 1539) देव उठनी ग्यारस को ‘कतरियासर’ (बीकानेर) के एक जाट परिवार में हुआ !
जनमान्यता के अनुसार, कतरियासर गाँव के जागीरदार हमीर जाट को एक रात स्वप्न में दिखाई दिया ! की उत्तर दिशा में स्थित तालाब के किनारे एक बालक बैठा है ! प्रात: तालाब के तट पर हाँ सचमुच एक सुंदर बालक को देखकर निस्संतान हमीर जी’ अत्यंत के प्रसन्न हुए ! और इस छोटे से बालक को घर पर लाकर अपनी पत्नी ‘रूपादे’ को सौंप दिया ! यह बालक आगे जाकर प्रसिद्ध संत जसनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ था ! इनका लालन-पालन हमीर जाट और रूपादे ने बड़े प्यार से किया और इतना लाड़ प्यार दुलार दिया की रूपादे अपनी ममता के आंचल से हमेशा रक्षा करती थी ! हमीर देव और रूपा दे जसनाथजी पर अपनी जान छिड़कते थे !
इनकी शिक्षा 1551 में आश्विन शुक्ल सप्तमी को गोरक्षक पीठ के गोरख आश्रम में हुई ! गोरखनाथ जी के पंथ में दीक्षित होने के उपरांत आजीवन ब्रह्मचारी रहते हुए गोरखामालिया नामक स्थान पर 12 वर्ष तक तपस्या की ! संत जसनाथ जी महाराज ने 1504 ई. में जसनाथी संप्रदाय की स्थापना की ! जसनाथी संप्रदाय में छत्तीस प्रकार की शिक्षाएँ (नियम) अपनाते हुए निराकार ब्रह्मा-शिव का स्मरण किया जाता है !’ जसनाथ जी महाराज के प्रिय भक्त गले में काली ऊन का धागा पहनते हैं तथा संत भगवा वस्त्र धारण करते हैं  ! वह जसनाथ जी के प्रमुख ग्रंथ ‘सिंभूधड़ा’ व ‘कोडा’ हैं  जसनाथजी ने 1506 ई. में सिर्फ ओर सिर्फ 24 वर्ष की जवान आयु में ही ! बीकानेर के कतरियासर में आश्विन शुक्ल सप्तमी को जीवित समाधि ले ली थी !

जसनाथ जी महाराज के चमत्कारों की कहानी (Story of Miracles of Jasnath Ji Maharaj)

जसनाथी संप्रदाय के वे अनुयायी जो इस संसार से विरक्त हो जाते हैं ‘परमहंस’ कहलाते हैं !
जसनाथ जी महाराज के चमत्कारों से खुश होकर सिकंदर लोदी ने जसनाथ जी महराज को कतरियासर जो की बीकानेर में स्थित है ! यहां पर पांच सौ  बीघा जमीन भेंट की जसनाथ जी के चमत्कारों के संबंध में सुप्रसिद्ध कथा है कि जब जसनाथ जी एक वर्ष के हुए थे ! तब उनकी माता रूपा दे इन्हें जलती हुई अँगीठी से बाँध कर बाहर कोई काम के लिए चली गई थी ! जब वापस आने पर माता ने देखा कि बालक जसनाथ अँगीठी के अंदर बैठा हुआ ! जलते हुए अंगारों को अपने सिर पर डाल डाल कर खेल रहा था !
इस पर माता जोर-जोर से रोने चिलाने लगी तब बालक जसनाथ एकदम अचानक अँगीठी से निकलकर माँ की गोद में आकर के चुपचाप बैठ गया ! और खेलने लग गया, इस पर माँ आश्चर्यचकित रह गईं ! इसी कारणवंश जसनाथी संप्रदाय के लोग धधकते हुए अंगारों पर ‘अग्नि नृत्य किया करते है ! और यह नृत्य राजस्थान का एकमात्र धार्मिक लोक नृत्य के रूप में जाना जाता है !

जसनाथजी की प्रमुख पाँच उप पीठे है (There are five main sub-peeths of Jasnathji)

जसनाथ जी

  1. मालासर (बीकानेर)
  2. लिखमादेसर (बीकानेर)
  3. पूरनासर (बीकानेर)
  4. बमल (बीकानेर)
  5. पाँचला (नागौर) हैं !
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