जैसलमेर के मंदिर Jaisalmer Temples

नमस्कार दोस्तों आज हम राजस्थान जैसलमेर के मंदिर के बारे में विस्तार से जानेगे 

राजस्थान जैसलमेर के प्रमुख मंदिर Major Temples of Rajasthan Jaisalmer In Hindi

स्वर्ण नगरी, हवेलियों व झरोखों का शहर,म्यूजियम सिटी,रेगिस्तान का गुलाब,राजस्थान का अंडमान है

रामदेवरा मंदिर (जैसलमेर के मंदिर) Ramdevra Temple (Temples of Jaisalmer) –

जैसलमेर के मंदिर में पोकरण के निकट रुणेचा कस्बे में बाबा रामदेव का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है ! जहाँ सभी क्षेत्रों से सभी समुदायों के लोग आते हैं ! और यह राष्ट्रीय एकता व साम्प्रदायिक सद्भाव का मुख्य केन्द्र है ! इस मंदिर के पुजारी तँवर जाति के राजपूत होते हैं ! तीर्थयात्रियों को जातरु कहा जाता है ! रामदेवजी को प्रिय श्वेत तथा नीले घोड़े चढ़ाये जाते हैं  ! रामदेवरा से 12 किमी दूरी पर पंच पीपली नामक धार्मिक स्थल है !

जहाँ पर रामदेवजी ने पाँचों पीरों को पर्चा दिया था.रामदेवरा में उनकी शिष्या डाली बाई की समाधि व उसका कड़ा भी है ! रामदेव जी ने कामड़िया पंथ की स्थापना की थी !

अमर सागर जैन मंदिर

जैसलमेर के निकट अमर सागर तालाब के किनारे सन् 1871 में बना यह भव्य जैन मंदिर. न केवल शिल्पकला की दृष्टि से उत्कृष्ट अपितु वास्तुशास्त्र का भी जीवन्त उदाहरण है ! यहां हिम्मतराम बाफना द्वारा भव्य जैन मंदिरों का निर्माण कराया गया !

स्वांगिया जी के मंदिर –

स्वांगिया जी भाटियों की कुल देवी है  ! स्यांगिया देवी का प्रतीक त्रिशूल है जैसलमेर में इनके 7 मंदिर है !

काला डूंगरराय का मंदिर –

इस मंदिर का निर्माण महारावल जवाहरसिंह ने निर्माण कराया था !

भादरियाराय का सुग्गा माता मंदिर Bhadriya Rai’s Suga Mata Temple Jaisalmer –

जैसलमेर के मंदिर में यह मंदिर जोधपुर जैसलमेर मार्ग पर धोलिया गांव के निकट भादरिया गाँव में स्थित है ! महारावल गजसिंह ने इसका निर्माण कराया था ! मंदिर को आधुनिक रूप संत हरवंश सिंह निर्मल ने दिया !

तनोटराय का मंदिर जैसलमेर Temple of Tanotarai Jaisalmer –

जैसलमेर के मंदिर में भाटी तणु राव ने स्वांगिया देवी का मंदिर तनोट में बनवाया इसे तनोट देवी भी कहते हैं ! इसकी पूजा अर्चना जैसलमेर राजघराने की ओर से करने की व्यवस्था की गई ! 1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद अब पूजा का कार्य सीमा सुरक्षा बल के भारतीय सैनिकों द्वारा सम्पादित किया जाता है ! देवी के मंदिर के सामने ही 1965 के भारत-पाक युद्ध में भारत की विजय का प्रसिद्ध स्मारक विजय स्तंभ भी स्थित है ! तनोट देवी को थार की वैष्णो देवी भी कहते हैं !

तेमडीराय का मंदिर –

यह मंदिर जैसलमेर के दक्षिण में गरलाउणे नामक पहाड़ की कंदरा में बना हुआ है ! यहाँ पर श्रद्धालु भक्तों को देवी के दर्शन छछुन्दरी के रूप में होते हैं ! चारण लोग इसे द्वितीय हिंगलाज मानते हैं !

घंटियाली राय का मंदिर –

स्वांगिया देवी का यह मंदिर तनोट से 5 किमी की दूरी पर दक्षिण पूर्व में स्थित है !

देगराय का मंदिर –

जैसलमेर के पूर्व में देगराय जलाशय पर निर्मित मंदिर.

गजरूप सागर देवालय –

यह जैसलमेर में गजरूप सागर तालाब के पास समतल पहाड़ी पर निर्मित स्वांगिया देवी का मंदिर है ! इसका निर्माण महारावल गजसिंह ने करवाया था !

आदिनारायण का मंदिर (जैसलमेर के मंदिर) Adi Narayan’s Temple (Jaisalmer Temple) –

जैसलमेर के मंदिर में जैसलमेर के यदुवंशी शासकों के आदि देव के रूप में आदिनारायण का मंदिर जैसलमेर दुर्ग में स्थित है ! आदिनारायण का अष्टधातु का विग्रह यहाँ टीकमराय’ के नाम से प्रसिद्ध है ! प्राप्त शिलालेख के अनुसार इस प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य महारावल जसवंत सिंह (1700-1707 ई.) के पुत्र जगत सिंह ने अपनी माता की स्मृति में करवाया था !

भगवान लक्ष्मीनाथ का मंदिर –

जैसलमेर दुर्ग में स्थित इस मंदिर का निर्माण रावल लक्ष्मण के राज्यकाल में किया गया ! इसमें लक्ष्मी व विष्णु की युग्म प्रतिमा है ! इस मंदिर

का मंदिर के निर्माण में शासक के अतिरिक्त सातों जातियों द्वारा निर्माण कार्य में सहयोग प्रदान. करने के कारण यह जन-जन का मंदिर कहलाता है ! यहाँ प्राप्त एक प्रस्तर लेख के अनुसार इस मंदिर की स्थापना सन् 1437 में हुई !

पार्श्वनाथ मंदिर Parshvanath Temple, Jaisalmer –

जैसलमेर के मंदिर में जैसलमेर दुर्ग में स्थित यह मंदिर अपने स्थापत्य, मूर्तिकला व विशालता हेतु विख्यात है ! वृदिरत्न माला के अनुसार इस मंदिर में मूर्तियों की कुल संख्या 1235 है ! इसके शिल्पकार का नाम घन्ना था ! और इसका निर्माणकाल वि.सं. 1473 किया गया था ! तब जैसलमेर पर रावल लक्ष्मण सिंह का शासन था !

संभवनाथ मंदिर –

इस मंदिर की स्थापना रावल बैर सिंह के समय वि. स. 1497 में शिवराज, महिराज व लखन नामक श्वेताम्बर पंथी जैन परिवार द्वारा कराया गया ! इस देवालय के रंगमहल की गुम्बदनुमा छत स्थापत्य में दिलवाड़ा मंदिर के समान है ! इस देवालय के भूगर्भ में बने कक्ष में दुर्लभ पुस्तकों का भंडार ‘जिनदत्त सूरी ज्ञान भंडार स्थित है !

 शांतिनाथ कुन्थुनाथ जी का मंदिर जैसलमेर Temple of Shantinath Kunthunath ji Jaisalmer –

जैसलमेर के मंदिर में यह जुड़वाँ मंदिर है प्रथम तल का मंदिर कुन्थुनाथ को व ऊपर का शांतिनाथ जी को समर्पित है ! इस मंदिर के शिखर को महामेरु पर्वत की कल्पना कर साकार किया गया है ! यह मंदिर वि.स. 1536 में बनकर तैयार हुआ ! और इस मंदिर का निर्माण जैसलमेर निवासी चोपड़ा और शंखवाल गोत्रीय जैन धर्मानुयायी परिवारों ने संयुक्त रूप से करवाया था !

यह मंदिर की एक विशिष्टता यह भी है कि इस मंदिर में खेतसी नामक. शंखवाल गोत्रीय व्यक्ति ने दशावतार और लक्ष्मीनाथ भगवान की प्रतिमाएं स्थापित कराकर. हिन्दू-जैन धर्म की समन्वयता को प्रोत्साहित किया था ! यही कारण है कि इस मंदिर में दोनों धर्मों के पालनकर्ता समान रूप से पूजा अर्चना करते हैंन ! जैसलमेर के समस्त जैन मंदिरों में यह सर्वश्रेष्ठ है !

चंद्रप्रभु मंदिर –

यह तीन मंजिला विशाल जैन मंदिर जैन तीर्थकर चन्द्रप्रभु को समर्पित है ! रणकपुर के मंदिर के स्थापत्य के समान इस मंदिर को 12वीं सदी  में निर्मित किया गया था ! अलाउद्दीन खिलजी ने जैसलमेर पर आक्रमण के समय इसका विध्वंस कर दिया था ! जैन धमानुयायियों ने इसका पुनर्निर्माण कराया !

लोद्रवा जैन मंदिर –

जैसलमेर के मंदिर लोद्रवा नामक स्थल 10वीं सदी में परमारों के अधीन था ! जैसलमेर के भाटी शासक इसे विजित कर इस क्षेत्र के अधिपति बने थे ! वर्तमान में विद्यमान लोद्रवा जैन मंदिर का निर्माण वि.स. 1675 में थारूशाह नामक श्रेष्ठी ने करवाया ! मंदिर के गर्भगृह में सहस्रफण पार्श्वनाथ की श्याम प्रतिमा प्रतिष्ठित है ! मूर्ति के चेहरे पर जड़ा हुआ हीरा मूर्ति के अनेक रूपों के दर्शन करवाता है ! इस मंदिर के चारों कोनों पर एक- एक मंदिर बना हुआ है ! जो हिन्दू मंदिरों के पंचायतन शैली का प्रतिरूप है ! मंदिर प्रांगण में पीले पत्थर से सुमेरू पर्वत की संरचना कर अष्ट धातु का एक कल्पवृक्ष निर्मित किया गया है !

रामकुंडा का मंदिर –

जैसलमेर के मंदिर में यह रमणीक स्थान काक नदी के किनारे स्थित है ! यहाँ पर महारावल अमरसिंहजी के राज्यकाल में तपस्वी साधु महाराज अणतराम जी का आगमन हुआ था ! अणतराम जी ने इसी कुंड के पास अपना आश्रम बनवाया था ये रामानंदी साधु थे ! इस कारण इस कुण्ड को रामकुण्ड कहा जाने लगा ! रामकुण्ड मंदिर का निर्माण महारावल अमरसिंह जी की पत्नी मनसुखी देवी ने करवाया था ! मंदिर में राम और सीता की मूर्तियाँ स्थापित है ! जैसलमेर में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का यह प्रथम मंदिर है ! रामनवमी के दिन यहाँ मेला लगता है !

वैशाखी हिन्दू महातीर्थ Jaisalmer Temples hindi main –

जैसलमेर के मंदिर मेंजैसलमेर के ‘ब्रह्मकुण्ड’ (ब्रह्मसागर) के पास वैशाखी नामक प्राचीन हिन्दू तीर्थ है ! वैशाख पूर्णिमा को महातीर्थ यहाँ मेला भरता है तथा तीर्थयात्री वैसाखी के कुण्डों में स्नान करते हैं ! प्राचीन मान्यता है कि इस दिन सरस्वती नदी जल इन कुण्डों में आता है ! प्राचीन काल में इस मरू क्षेत्र में सरस्वती नदी बहती थी। वर्तमान में उसे काक नदी कहा जाता है !

 चून्धी गणेश मंदिर  –

जैसलमेर मंदिर में लोद्रवा मार्ग पर भीलों की ढाणी के पास काक नदी के मध्य गणेश की प्राकृतिक प्रतिमा है ! इस स्थान को च्यवन ऋषि का आश्रम कहा जाता था ! कालान्तर में इसका नाम चून्धी हो गया ! यहाँ गंगा सप्तमी और गणेश चतुर्थी को मेला लगता है !


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