डूंगरपुर के मंदिर Dungarpur Temples

नमस्कार दोस्तों आज हम राजस्थान के डूंगरपुर के मंदिर के बारे में विस्तार से जानेगे 

राजस्थान डूंगरपुर के प्रमुख मंदिर Major Temples of Rajasthan Dungarpur In Hindi

डूंगरपुर मंदिरो की सूची –

  • देव सोमनाथ मंदिर डूंगरपुर
  • बेणेश्वर धाम(वागड़ का पुष्कर और वांगड का कुंभ) मंदिर डूंगरपुर
  • विजय राजेश्वर मंदिर डूंगरपुर
  • सैयद फखरुद्दीन की मस्जिद,गलियाकोट
  • गवरी बाई का मंदिर डूंगरपुर
  • वागड़ की मीरां गवरी बाई का मंदिर डूंगरपुर
  • संत मावजी का मंदिर, साबला मंदिर डूंगरपुर
  • नागफैनजी मंदिर डूंगरपुर
  • वसुंदरा (वसुंधरा) देवी का मंदिर डूंगरपुर
  • बोरेश्वर महादेव का मंदिर डूंगरपुर
  • भुवनेश्वर शिव मंदिर डूंगरपुर
  • मुरलीमनोहर का मंदिर डूंगरपुर
  • शिवज्ञानेश्वर शिवालय मंदिर डूंगरपुर
  •  फूलेश्वर महादेव मंदिर डूंगरपुर
  • राधे बिहारी का मंदिर डूंगरपुर
  • महालक्ष्मी का मंदिर डूंगरपुर
  • रामचंद्र जी का मंदिर डूंगरपुर
  • श्रीनाथजी (गोवर्धन नाथ का मंदिर) मंदिर डूंगरपुर

देव सोमनाथ डूंगरपुर के मंदिर  (Dungarpur Temples hindi) –

डूंगरपुर के मंदिर में यह प्राचीन शिव मंदिर सोम नदी के किनारे देवगाँव में स्थित है ! संभवत: 12वीं सदी में निर्मित देवसोमनाथ शिवालय वागड़ का सांस्कृतिक वैभव तो है ही ! वास्तुशिल्प की दृष्टि से भी अद्वितीय है ! इसमें बिना सीमेन्ट और चूने के विशिष्ट शिल्पविधि से पत्थरों को जोड़कर निर्मित किया गया है ! आकर्षक झरोखे, कलात्मक शिखर और विशाल आकार वाला यह मंदिर राज्य के अतिरिक्त अन्य. प्रान्तों कर श्रद्धालुओं की आस्था का भी केन्द्र है डूंगरपुर के मंदिर में सोमनाथ  !

बेणेश्वर धाम(वागड़ का पुष्कर और वांगड का कुंभ) मन्दिर (Dungarpur Temples hindi) –

डूंगरपुर के मंदिर में माही, सोम और जाखम नदियों के संगम पर नेवटापारा गाँव के पास स्थित. बेणेश्वर धाम वनवासियों (आदिवासियों ) का महातीर्थ है ! यहाँ पहाड़ी पर प्राचीन शिवालय है इसे महारावल आसकरण ने बनवाया था ! बेणेश्वर धाम का सर्वोपरि महत्त्व मृतात्माओं के मुक्तिस्थल के रूप में भी है ! संत मावजी महाराज का संबंध इसी धाम से है ! बेणेश्वर मेले का शुभारम्भ माघ शुक्ला ग्यारस के शुभ दिन
एवं वागड़ का कुंभ) बेणेश्वर पीठाधीश्वर (वर्तमान में गोस्वामी अच्युतानन्द महाराज) द्वारा बेणेश्वर धाम के प्रधान देवालय हरि मंदिर. (राधा-कृष्ण मंदिर) पर सात रंगों वाला ध्वज चढ़ा कर किया जाता है, जो पूर्णिमा तक चलता है !

विजय राजेश्वर मंदिर –

डूंगरपुर के गैबसागर पर पारेवा प्रस्तर से निर्मित इस चतुर्भुजाकार भव्य मंदिर का निर्माण. महारावल विजयसिंह ने प्रारम्भ करवाया था ! जिसे उनके पुत्र महारावल लक्ष्मणसिंह ने पूर्ण करवाया !

सैयद फखरुद्दीन की मस्जिद,गलियाकोट डूंगरपुर (Dungarpur Temples hindi) –

डूंगरपुर के मंदिर में परमार राजाओं से संबंधित और सागवाड़ा तहसील में माही नदी के तट पर स्थित. यह स्थान वर्तमान में दाउदी बोहरा सम्प्रदाय के बावजी मस्जिद, गलियाकोट मौला सैयद फखरुद्दीन शाहीद की मस्जिद के लिए प्रसिद्ध है ! इनकी मजार को ‘मजार-ए-फखरी’ कहते हैं ! यह दाउदी बोहरा सम्प्रदाय का प्रधान तीर्थ स्थल है यहाँ हर वर्ष उर्स भरता है  ! गलियाकोट की गोबर के कंडों से खेली जाने वाली होली प्रसिद्ध है ! और गलियाकोट का अन्य नाम  ताहेराबाद है ! दाउदी बोहरा समुदाय इस्माइली शिया मुस्लिम संप्रदाय की शाखा है !

गवरी बाई का मंदिर

वागड़ की मीरां गवरी बाई का मंदिर डूंगरपुर में महारावल शिवसिंह ने निर्मित कराया

संत मावजी का  मंदिर (डूंगरपुर मंदिर) (Dungarpur Temples hindi) –

डूंगरपुर के मंदिर में साबला पूंजपुर के निकट साबला ग्राम में संत मावजी का मुख्य हरि मंदिर है ! मावजी को विष्णु का कल्कि (निष्कलंकी ) अवतार माना जाता है ! यह बेणेश्वर धाम से कुछ दूरी पर ही साबला ग्राम में है ! और संत मावजी (सन् 1714-49) ने भीलों में सामाजिक व धार्मिक सुधार हेतु एक आंदोलन चलाया था ! वे कृष्ण के भक्त थे और स्वयं कृष्ण का रूप धारण कर रासलीला करते थे !

 

वह स्वयं को कृष्ण का निष्कलंकी अवतार मानते थे वे मोक्ष प्राप्ति हेतु योग साधना, भक्ति और कर्म को आवश्यक मानते थे ! और बाह्याडम्बरों के विरोधी थे ! जाति प्रथा का विरोध करते हुए उन्होंने अछूतों और भीलों का उद्धार किया संत मावजी ने. जाति प्रथा के बंधन समाप्त होने, राजतंत्र और जागीरदारी प्रथा की समाप्ति, मुद्रा अवमूल्यन, धातु मुद्रा के स्थान. पर कागज की प्रतीक मुद्रा के प्रचलन, ब्राह्मणों का एकाधिकार समाप्त होने, उत्तर से प्रलयंकारी शक्ति का आगमन, पश्चिम से शांति स्थापित. करने वाली शक्ति का अवतरण तथा भयंकर युद्ध और नरसंहार होने आदि भविष्यवाणियाँ की थी !

 

उनकी भविष्यवाणियाँ उनके द्वारा लिखित उपदेशों (मावजी की वाणी) जो चौपड़ा कहलाती है ! उनकी ये भविष्यवाणियाँ वर्तमान में अक्षरशः सत्य सिद्ध हो रही हैं ! मावजी ने आदिवासी समाज में व्याप्त कुप्रथाओं और आडम्बरों को समाप्त कर. सादा और सरल जीवन जीने का उपदेश दिया है ! यह डूंगरपुर के प्रमुख मंदिर में सबसे सुंदर और दर्सनिय मंदिर है !

मावजी संत द्वारा रचित ग्रंथ –

‘न्याय’, ‘ज्ञान भंडार’, ‘अकलरमण’, ‘सुरानंद’, ‘ज्ञानरत्नमाला’, ‘कालिंगा-हरण’ आदि संत मावजी द्वारा रचित ग्रंथ है ! साबला और पूंजपुर के अतिरिक्त डूंगरपुर राज्य में बेणेश्वर व ढालावाला, मेवाड़ राज्य में सैंसपुर (सलूंबर के पास) और बाँसवाड़ा राज्य में पारोदा गाँव में मावजी के मंदिर है !

 नागफैनजी मंदिर ( डूंगरपुर मंदिर) (Dungarpur Temples hindi) –

डूंगरपुर के मंदिर में यह जैन मंदिर डूंगरपुर में स्थित है. इस मंदिर में देवी पद्मावती, नागफैनजी पार्श्वनाथ व धरणेन्द्र की मूर्तियाँ है ! इसके पास ही नागफैन जी शिवालय भी है !

वसुंदरा (वसुंधरा) देवी का मंदिर

यह प्राचीन मंदिर डूंगरपुर के वसूंदरा गाँव में स्थित है।

बोरेश्वर महादेव का मंदिर –

डूंगरपुर के सोलज गाँव के निकट सोम नदी के किनारे बोरेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है ! जिसका निर्माण महारावल सामन्तसिंह द्वारा सन् 1179 ई. में सोम नदी के किनारे पर करवाया गया था !

भुवनेश्वर शिव मंदिर –

यह शिव मंदिर, डूंगरपुर से 9 किमी दूर भुवनेश्वर गाँव में एक पहाड़ी पर स्थित है ! यहाँ प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग है !

मुरलीमनोहर का मंदिर

डूंगरपुर के महारावल वैरिशाल की रानी शुभकुँवरी ने दूंगरपुर में मुरली मनोहर का मंदिर बनवाया ! और 30 अप्रैल, 1800 को इसकी प्रतिष्ठा करवाई गई !

शिवज्ञानेश्वर शिवालय –

महारावल शिवसिंह द्वारा गैबसागर झील के तट पर अपनी माता की स्मृति में. शिवज्ञानेश्वर शिवालय बनवाया ! उन्होंने दक्षिण शिवालय कालिका का मंदिर भी बनवाया !

फूलेश्वर महादेव मंदिर

महारावल शिवसिंह की रानी फूलकुंवरी ने फूलेश्वर महादेव का मंदिर बनवाकर 10 फरवरी, 1780 को उसकी प्रतिष्ठा करवाई !

राधे बिहारी का मंदिर –

महारावल उदयसिंह द्वितीय द्वारा निर्मित मंदिर है !

महालक्ष्मी का मंदिर

महारावल विजयसिंह ने अपनी माता हिम्मत कुँवरी की स्मृति में बेणेश्वर में यह मंदिर बनवाया गया !

रामचंद्र जी का मंदिर –

गैब सागर की पाल पर महारावल उदयसिंह द्वितीय की पटरानी उम्मेद कुँवरी द्वारा निर्मित करवाया गया ! मंदिर।

श्रीनाथजी (गोवर्धन नाथ का मंदिर)

इस मंदिर का निर्माण महारावल पूंजराज ने करवाया था ! इसकी प्रतिष्ठा 25 अप्रैल, 1623 को की गई ! इसमें श्री और श्री राधिका जी की आदमकद प्रतिमाएँ है ! यह डूंगरपुर के मंदिर है !


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