डॉ भीमराव अंबेडकर (B. R. Ambedkar)

 

भीमराव रामजी आम्बेडकर

भीमराव अंबेडकर
डॉ भीमराव अंबेडकर
राज्य सभा के सदस्य, बॉम्बे राज्य
भारत के प्रथम कानून एवं न्यायमन्त्री
भारतीय संविधान सभा की मसौदा समिती के अध्यक्ष
श्रम मंत्री, वायसराय की कार्य-परिषद
बॉम्बे विधानसभा के विरोधी राजनेता
पद बहाल
1937–1942
बॉम्बे विधानसभा के सदस्य
पद बहाल
1937–1942
चुनाव-क्षेत्र बॉम्बे शहर
बॉम्बे विधान परिषद के सदस्य
जन्म 14 अप्रैल 1891
महू, मध्य प्रांत, ब्रिटिश भारत
(अब डॉ॰ आम्बेडकर नगर, मध्य प्रदेश, भारत में)
मृत्यु 6 दिसम्बर 1956(1956-12-06) (उम्र 65)
डॉ॰ आम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक, नयी दिल्ली, भारत
समाधि स्थल चैत्य भूमि, मुंबई, महाराष्ट्र
जन्म का नाम भिवा, भीम, भीमराव
अन्य नाम बाबासाहब आम्बेडकर
राष्ट्रीयता भारतीय
राजनीतिक दल
  • शेड्युल्ड कास्ट फेडरेशन
  • स्वतंत्र लेबर पार्टी
  • भारतीय रिपब्लिकन पार्टी
जीवन संगी
  •  रमाबाई आम्बेडकर
  •  डॉ॰ सविता आम्बेडकर
संबंध आम्बेडकर परिवार देखें
बच्चे यशवंत आम्बेडकर
निवास  • राजगृह, मुम्बई
• २६ अलिपूर रोड, डॉ भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक, दिल्ली
शैक्षिक सम्बद्धता  मुंबई विश्वविद्यालय (बी॰ए॰)
कोलंबिया विश्वविद्यालय (एम॰ए॰, पीएच॰डी॰, एलएल॰डी॰)
लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स (एमएस॰सी॰, डीएस॰सी॰)
ग्रेज इन (बैरिस्टर-एट-लॉ)
व्यवसाय वकील, प्रोफेसर व राजनीतिज्ञ
पेशा विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री,
राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद्
दार्शनिक, लेखक
पत्रकार, समाजशास्त्री,
मानवविज्ञानी, शिक्षाविद्,
धर्मशास्त्री, इतिहासविद्
प्रोफेसर, सम्पादक
धर्म बौद्ध धम्म

इस पोस्ट में हम आपको डॉ भीमराव अंबेडकर की सम्पूर्ण जीवनी के बारे में बताएंगेे – 

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ( जन्म 14 अप्रैल 1891 ) भारत के निर्माता, संविधान के निर्माता, भारत रत्न से सम्मानित डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर का जीवन परिचय तथा उनके महत्वपूर्ण कार्य।

जन्म :-

डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। इनका जन्म मध्य प्रदेश के महू गांव में हुआ था। वह इसी जाति से संबंध रखते थे, जिसे अछूत माना जाता था। प्रारंभ में उनका उपनाम सकपाल था, परंतु उनके पिता ने अपने मूल गांव अंबाडबे के कारण उनके पिताजी का नाम पर उनका उपनाम अंबावडेकर लिखवाया था।

इनके पिता जी का नाम :-

इनके पिता जी का नाम रामजी मालोजी सकपाल था। यह उस समय भारतीय सेना में सेवारत थे। इनके चौबीस 14 संतानें थीं। इनके माता जी का नाम भीमाबाई था।

विवाह :-

डॉ भीमराव अंबेडकर की शादी 15 वर्ष की उम्र में रमाबाई से 1906 में की थी। लेकिन सन 1935 में रमाबाई की मृत्यु हो जाने के कारण उन्होंने दूसरी शादी सविता से की थी। सन 1948 में कर ली थी। सविता एक ब्राह्मण महिला थी।

शिक्षा :-

डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में हुई थी। सन 1908 में उन्होंने 12वीं कक्षा पास कर ली थी। स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने मुंबई के एलफिस्टन कॉलेज में दाखिला लिया था। उन्हें गायकवाड राजा सयाजी से 25 रूपये स्कॉलरशिप मिलने लग गई थी। सन 1912 में डॉ भीमराव ने राजनीति विज्ञान व अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि ली थी।

इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चले गए थे। सन् 1916 में डॉ भीमराव अंबेडकर को उनके शोध के लिए पीएचडी से सम्मानित किया गया था। इसके बाद डॉ भीमराव लंदन गए थे। परंतु ने बीच में ही लौटना पड़ा था।

आजीविका के लिए संघर्ष :-

डॉ भीमराव अंबेडकर का परिवार निर्धन था। इस कारण से डॉक्टर भीमराव ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद आजीविका चलाने के लिए कार्य भी किया था। उन्होंने मुंबई के सिडनेय कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्राध्यापक के रूप में कार्य किया था। इसके पश्चात एक बार फिर डॉ भीमराव अंबेडकर इंग्लैंड चले गए थे। सन् 1913 में इनके पिताजी की मृत्यु हो गई थी।

डॉ भीमराव अंबेडकर द्वारा साप्ताहिक पत्रिकाओं का संपादन :-

सन 1920 में अंबेडकर ने कोलापुर के शासक के सहयोग से एक साप्ताहिक पत्रिका का संपादन किया था, जिसका नाम मूकनायक रखा था।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा दलितों के लिए सभा का गठन :-

डॉक्टर अंबेडकर ने दलितों के साथ अच्छे व्यवहार, छुआछूत, तथा उनकी स्थिति में सुधार लाने के लिए अनेक प्रयास किए थे। इन्होंने दलित वर्ग के लोगों के लिए बहिष्कृत हितकारिणी सभा का गठन भी किया था। इस सभा का मुख्य मुद्दा था कि समाज के किसी भी वर्ग को आगे बढाना है तो उनको शिक्षित करो शिक्षा दो।

दलित जनजाति के लोगों के प्रति डॉ भीमराव की सोच :-

अंबेडकर को बचपन से ही अस्पृश्यता से जूझना पड़ा था। विद्यालय से लेकर नौकरी करने तक उनके साथ भेदभाव किया जाता था। इस भेदभाव के कारण उनके मन को बहुत ठेस पहुंची थी। उन्होंने छुआछूत को पूरी तरह से मिटाने की मन में ठान ली थी। उन्होंने कहा कि दलित और जनजाति के लिए देश में एक अलग चुनाव प्रणाली होनी चाहिए। देश भर में घूम-घूम कर उन्होंने दलितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई थी और लोगों को जागरुक किया था।

स्वतंत्र मजदूर पार्टी की स्थापना :-

डॉ भीमराव अंबेडकर ने वर्ष 1936 में स्वतंत्र मजदूर पार्टी की स्थापना की थी।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने का मुख्य कारण :-

अंबेडकर का बचपन अत्यंत संस्कारी और धार्मिक माहौल में बीता था। इस वजह से उन्हें अच्छे संस्कार मिले थे। उनका मानना था कि मैं एक ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे सिखाता है। वर्ष 1950 में हुए एक बौद्धिक सम्मेलन में भाग लेने के कारण श्रीलंका गए थे। वहां वह बौद्ध धर्म से बहुत प्रभावित हुए थे। देश वापसी पर उन्होंने बौद्ध धर्म के बारे में पुस्तक लिखी थी। इसके बाद उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया था। सन 1955 में उन्होंने भारतीय बौद्ध महासभा की स्थापना की थी।

डॉ भीमराव अंबेडकर द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने की महत्वपूर्ण घटना :-

डॉक्टर अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने एक आम सभा का आयोजन किया था, जिसमें उनके 5 लाख समर्थकों ने बौद्ध धर्म को अपना लिया था।

डॉ भीमराव अंबेडकर का भारत के संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान :-

भारत के संविधान के निर्माण के लिए डॉक्टर अंबेडकर को संविधान का जनक और जननी कहा जाता है।

संविधान सभा के लिए चुनाव :-

डॉक्टर भीमराव ने सर्वप्रथम सविधान सभा के सदस्य बनने के लिए मुंबई की सीट से अपना नाम दर्ज करवाया था। लेकिन इस सीट पर चुनाव हार गए थे। इसके बाद डॉ भीमराव अंबेडकर ने दूसरी बार चुनाव लड़ने के लिए बंगाल की सीट के माध्यम से अपना नाम दर्ज करवाया था। लेकिन इस बार डॉक्टर भीमराव चुनाव जीत गए थे। यह चुनाव मुस्लिम लीग का साथ मिलने के कारण जीत गए थे।

संविधान सभा के सदस्य :-

डॉ भीमराव अंबेडकर मुकुंदराज बने।जयकर के इस्तीफा देने के बाद संविधान सभा के मुख्य सद्स्य बने।संविधान सभा के प्रारूप समिति के सदस्य बनने के बाद डॉक्टर अंबेडकर ने भारत के संविधान का निर्माण किया था। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संविधान का निर्माण करने के लिए 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन लगे थे। आखिरकार 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू कर दिया गया था।

डॉक्टर अंबेडकर की मुख्य पुस्तक :-

डॉ भीमराव अंबेडकर ने अंग्रेजी में वेटिंग फॉर ए विजा नाम की पुस्तक लिखी थी। इस पुस्तक में उनकी आत्मकथा है।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मुख्य उपाधियां :-

सन 1923 में डॉ भीमराव ने अपना शोध रुपये की समस्या को पूरा किया था। इस कारण से उन्हें लंदन विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि प्रदान की गई थी।। सन 1927 में कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई थी।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य :-

  1. डॉक्टर भीमराव अंबेडकर भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री बने थे।
  2. लोकसभा के चुनाव में हार हुई थी लेकिन राज्यसभा से एमपी बन गए थे।
  3. डॉ भीमराव अंबेडकर को दलितों का मसीहा भी कहा जाता था।
  4. डॉक्टर भीमराव को शिक्षा के क्षेत्र में सबसे ज्यादा शिक्षित व्यक्ति माना जाता है।
  5. साइमन कमीशन के सहयोग के लिए बनाई गई कमेटी के सदस्य भी थे।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मृत्यु :-

डॉ भीमराव अंबेडकर की मृत्यु 6 दिसंबर 1956 में मृत्यु हो गई थी। इनका अंतिम संस्कार बौद्ध धर्म के रीति-रिवाज के अनुसार हुआ था।

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को सम्मान :-

सन 1990 में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था।

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