दौसा के मंदिर Dausa Temples

हेलो दोस्तों आज हम राजस्थान के दौसा के मंदिर के बारे में विस्तार से जानेगे 

राजस्थान के दौसा के मंदिर Temples of Dausa, Rajasthan in hindi

आभानेरी मंदिर (Abhaneri Temple Dausa) –

दौसा के मंदिर आभानेरी नामक यह स्थान जयपुर-अलवर सड़क पर बांदीकुई से 7 कि.मी. दूर स्थित है ! यहां पर स्थित हर्षतमाता’ के मंदिर से प्राप्त खण्डहरों से गुर्जर-प्रतिहारकालीन उत्कृष्ट कला केन्द्र का पता चलता है, जिसका समय 8वीं-9वीं शताब्दी माना गया है !
अन्य मान्यता के अनुसार यह नगरी निकुम्भ चौहानों की राजधानी थी जिसके प्रसिद्ध राजा ‘चंद’ ने इसे बसाया था ! यह जनश्रुतियों से ज्ञात होता है कि इस नगरी का संबंध राजा भोज से था तथा इसका प्राचीन नाम अभयनगरी था ! स्थान ‘हर्षतमाता के मंदिर’ तथा ‘चाँद बावड़ी’ के कारण अत्यन्त प्रसिद्ध हो गया है। सम्भवतया देवी के मंदिर तथा उनकी प्रसन्न मुद्रा में निर्मित मूर्ति की आभा से आभासित यह प्रदेश प्रथम ‘आभा नगरी’ तत्पश्चात् ‘आभानेरी’ के नाम से विख्यात हुआ !
11वीं शताब्दी में इस प्रदेश को महमूद गजनवी ने नष्ट-भ्रष्ट कर दिया तथा मंदिर भी पूर्णतया क्षतिग्रस्त हो गया ! आधुनिक हर्षतमाता मंदिर प्राचीन मंदिर के अवशेषों से ही पुनर्निमित किया गया है ! मंदिर के गर्भगृह में एक देवी का आधुनिक प्रतिमा भी प्रतिष्ठित है ! मूल रूप से  यह मंदिर एक विष्णु मंदिर था जो यहां पर प्रतिष्ठित अन्य मूर्तियों से ज्ञात होता है ! इस मंदिर में तीन प्रदक्षिणा पथ थे जिनमें से अब दो ही अवशिष्ट है !

प्रमुख शिल्पाकृतियाँ (Major Artifacts Temple Dausa) –

दौसा के मंदिर इसकी प्रमुख विशेषता मंदिर की तृतीय वेदिका के चारों ओर ताखों में उत्कीर्ण के प्रतिमाएं हैं जिनमें शृंगार, नृत्य व प्रणय क्रीड़ाओं में रत प्रेमी युगल दिखाये गये हैं ! आभानेरी के इस प्राचीर मंदिर में – सूर्यदेव, महिषमर्दिनी के विभिन्न रूप, शृंगार-दुर्गा, पार्वती, अर्धनारीश्वर, शिव, नृत्यरत नटराज-शिव, रति-कामदेव आदि की प्रतिमाएँ उत्कीर्ण हैं ! इसके अतिरिक्त सूर्य-नारायण-शिव और ब्रह्मा की संयुक्त प्रतिमाएं, राज-लक्ष्मी, कुबेर एवं गणेश की संयुक्त प्रतिमा, कृष्ण-लीला से सम्बन्धित दृश्य-फलक जो मण्डप की गुम्बदाकार छत में सुशोभित हैं, अत्यन्त प्रभावपूर्ण हैं ! कुछ अन्य शैव मूर्तियाँ भी यहां दृष्टव्य हैं ! ऊँची जगती पर बना यह भव्य मंदिर पूर्वाभिमुख था जिसमें प्रदक्षिणा पथ का प्रावधान है!

कृष्ण रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न मंदिर (Krishna Rukmini’s son Pradyumna Temple Dausa) –

यह मूल रूप से पंचायतन मंदिर था ! कृष्ण-रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न की स्वतंत्र मूर्ति का एकमात्र अंकन आभानेरी में ही प्राप्त है, जो अनूठा है ! वृष्णिवंश के चार वीरों में प्रद्युम्न का प्रमुख स्थान है ! सभा मंडप में घटपल्लव एवं कीर्तिमुख से युक्त अनेक स्तम्भ यथास्थान खड़े हैं ! मूल रूप से इसके अंग थे-पंचरथ, सान्धार गर्भगृह, अंतराल, गूढमण्डप, रंगमण्डप तथा मुखमण्डप। गर्भगृह के वेदीबन्ध के भद्ररथों के देवकोष्ठों में अनिरूद्ध (दक्षिण), प्रद्युम्न (पश्चिम), तथा संकर्षण-बलराम (उत्तर) विराजमान हैं !
दौसा के मंदिर का अनुमान है कि मूल रूप गर्भगृह में वासुदेव-कृष्ण की प्रतिमा पधराई गई थी ! और यह चतुर्वृह विष्णु का भारत में एकमात्र
देवालय था ! केवल दक्षिण-पूर्व कर्ण पर जंघा का अंश बचा है जिसमें अग्नि की ज्वालामय मूर्ति बनी है ! स्पष्ट है कि मंदिर के विभिन्न कोनों पर पूरे अष्ट दिक्पालों की मूर्तियां बनाई गई थी ! प्रदक्षिणा की दीवार तथा उपरली जगती के आले (देवकोष्ठ) मिथुनों की शृंगार प्रधान मूर्तियों से सुसज्जित थे जिनमें से थोड़ी अभी भी अपने स्थान पर लगी हैं !
 मुख्यतः इन्हीं कलात्मक मूर्तियों के कारण आभानेरी की ख्याति है !
  • चाँद-बावड़ी
दौसा के मंदिर में आभानेरी में ही हर्षतमाता के मंदिर से कुछ दूरी पर ही चाँद-बावड़ी है, जो आज भी अच्छी अवस्था में देखी जा सकती है ! बावड़ी में तीन ओर सीढ़ियाँ हैं, जो हजारों की संख्या में हैं और बड़ी ही सुन्दर दिखाई देती हैं और चौथी व सामने की ओर दो छोटे-छोटे चौबारे हैं जिनमें गणेश व महिषमर्दिनी की प्रतिमाएँ प्रतिष्ठित हैं ! सम्भवतया कुण्ड में स्नान आदि करते समय इनके दर्शन लाभ लिये जाते होंगे ! इस बावड़ी के बाहर के आंगन में भी स्थान-स्थान पर मंदिर की मूर्तियों के अवशेष देखे जा सकते हैं !

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर दौसा (Mehandipur Balaji Mandir Dausa) –

आगरा बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिकन्दरा से 26 किलोमीटर उत्तर की ओर दौसा के मंदिर मेहंदीपुर बालाजी का भव्य मंदिर भारत भर के हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र है ! यहाँ भूत-प्रेतों की बाधा से मुक्ति दिलवायी जाती है ! मेंहदीपुर गाँव दौसा जिले की सिकराय तहसील में आता है ! यहाँ भारत के कोने-कोने से भूत-प्रेत बाधा से निवारण के लिये पीड़ित व्यक्तियों को लाया जाता है ! यहाँ स्थित प्रेतराज का तिबारा अत्यन्त प्राचीन है ! मेहंदीपुर में बालाजी (हनुमानजी), प्रेतराज तथा कोतवाल कप्तान के नाम से पूजे जाने वाले दो भैरवों की मान्यता है !
रोगी को स्वयं मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाना होता है जिसे अर्जी कहा जाता है ! अर्जी लग जाने के बाद रोगी की निदान प्रक्रिया अपने आप आरंभ हो जाती है ! प्रसाद का कुछ भाग ग्रहण करने के बाद रोगी घूमने लगता है, स्वयं ही अपने आप को मारने लगता है, हाथों में जंजीरें कस लेता है, सिर पर जूतों की बौछार करता है तथा शांत होकर घण्टों तक आरती एवं वंदना करने लगता है ! कई महिला रोगी मंदिर के पार्श्व में बने कुण्ड में उलटी लटक जाती हैं किंतु उनके कपड़े नीचे नहीं गिरते ! आज के वैज्ञानिक युग में यह मंदिर आज भी एक चमत्कार ही है जो विज्ञान को चुनौती देता हुआ प्रतीत होता है ! दौसा के मंदिर मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर बहुत ही प्रसिद माना जाता है !

झांझीरामपुरा महादेव का मंदिर (Temple of Jhanjhirampura Mahadev) –

झांझीरामपुरा की स्थापना ठाकुर रामसिंह ने की , यहां झाझेश्वर महादेव का मंदिर है ! यहां एक जलहरी में 121 महादेव हैं ! यहां निर्मित्त गौमुख से सर्दियों में गरम तथा गर्मियों में ठंडा पानी बहता है ! श्रावण मास में यहां विशाल मेला भरता है !

भाण्डारेज गाँव के मंदिर (temple of bhandarej village) –

 दौसा का भाण्डारेज गाँव प्राचीन कला और संस्कृति की मिसाल है ! यहां बावड़ियाँ, कुण्ड, भूतेश्वर महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर व गोपालगढ़ स्थित है !

अन्य मंदिर दोसा (Other Temples Dausa) –

दौसा के मंदिर में और भी मंदिर है जेसे लक्ष्मण मंदिर-सिकन्दरा, गोपालजी का मंदिर-सिकन्दरा, कटारमल भैरव मंदिर-सिकन्दरा, गिर्राजजी मंदिर-दौसा, नीलकण्ठ महादेव मंदिर-दौसा, नाथ सम्प्रदाय का गुरुद्वारा-हींगवा !

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