दौसा दुर्ग की पूरी जानकारी Dausa Fort

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दौसा दुर्ग की पूरी जानकारी - Dausa Fort
दौसा दुर्ग की पूरी जानकारी - Dausa Fort

राजस्थान के दौसा जिले में स्थित दौसा दुर्ग जो की ऐतिहासिक दुर्गों में से एक है !  देवागिरि नाम की पहाड़ी पर स्थित है यह दुर्ग एक बहुत ही सुंदर पर्यटन स्थल माना जाता है !

दौसा दुर्ग या दौसा किले का इतिहास Dausa Fort History in hindi

  • परिचय
  • दुर्ग का नाम – दौसा दुर्ग या किला ( Dausa Fort )
  • निर्माण करवाया – बड़गुजरों (गुर्जर प्रतिहारों) द्वारा करवाया गया
  • किले का निर्माण कब हुआ – 966 ई.
  • जिला – दौसा
  • राज्य – राजस्थान ( भारत )

दौसा दुर्ग में कछवाहा वंश के संस्थापक दुल्हेराय ने 966 ई. में कछवाहा वंश की नींव रखी थी ! दौसा दुर्ग कछवाहा वंश की प्रथम राजधानी था दौसा दुर्ग गिरि दुर्ग की श्रेणी में आता है ! इस दुर्ग का निर्माण देवगिरि नामक पहाड़ी पर संभवत् बड़गुजरों (गुर्जर प्रतिहारों) द्वारा करवाया गया था ! जिसका बाद में कछवाहा शासकों ने जीर्णोद्धार करवाया ! इस दुर्ग की आकृति सूप (छाजले) के समान है ! 11वीं शताब्दी में नरवर (मध्य प्रदेश) के दुल्हेराय का विवाह चौहान शासक सालार सिंह (रालण सिंह) की पुत्री कुमकुमदे के साथ दौसा के पास मोरां वर्तमान गढ़ मोरां में हुआ ! उस समय चौहानों और देवती के बड़गुर्जरों के मध्य दौसा को लेकर झगड़ा चल रहा था !

क्योंकि दोनों (चौहानों और देवती के बड़गुर्जरों) के मध्य दौसा का आधा-आधा भाग अधिकार में था ! चौहानों ने दुल्हेराय को दौसा का आधा भाग दहेज में दे दिया ! उसके बाद दुल्हेराय ने अपने ससुराल पक्ष की सहायता से दौसा दुर्ग के बड़ गुर्जरों को हराकर वहाँ कछवाहा वंश की नींव रखते हुए ! अपनी प्रारंभिक राजधानी बनवाई ! इसे दुर्ग में भारमल के शासनकाल में आमेर के दिवंगत राजा पूरणमल के पूत्र सूजा (सूरजमल) का लाला नरूका ने दौसा में ही धोखे से वध किया था !

दौसा किले में प्रवेश के लिए दो प्रमुख दरवाजे हैं – Dausa Fort hindi

  • (i) हाथी पोल
  • (ii) मोरी दरवाजा

मोरी दरवाजा जो बहुत छोटा और संकरा है इसका निर्माण दौसादुर्ग के युद्ध के समय आने-जाने के लिए करवाया गया था !

किले में देखने के लिए प्रसिद – Dausa durg hindi main

दौसा दुर्ग में राजाजी का कुआँ, चार मंजिल की एक विशाल बावड़ी, बैजनाथ महादेव का भव्य एवं प्राचीन मंदिर, ! रामचन्द्रजी का मंदिर, दुर्गा माता का मंदिर, जैन मंदिर, एक मस्जिद, पहाड़ी के ऊपर दो प्राचीन गोलाकार बुर्ज जिसका उपयोग राजनैतिक कैदियों को रखने के लिए ! कारागार के रूप में किया जाता था ! दौसा किले की सबसे ऊंची चोटी पर नीलकंठ महादेव का मंदिर व 13.6 फीट लंबी एक लोहे की जाली युक्त विशालकाय तोप रखी है ! प्राचीन महल प्रमुख 14 राजाओं की साल दर्शनीय है !


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