बांसवाड़ा के मंदिर Banswara Temples

नमस्कार दोस्तों आज हम राजस्थान बांसवाड़ा के मंदिर के बारे में विस्तार से जानेगे 

राजस्थान बांसवाड़ा के प्रमुख मंदिर Rajasthan Banswara Temples In Hindi

  • घोटिया अम्बा बांसवाड़ा
  • धूणी के रणछोड बांसवाड़ा
  • विट्ठल देव का मंदिर बांसवाड़ा
  • कालिंजरा मंदिर कालिंजरा गाँव बाँसवाड़ा 
  •  ब्रह्मा मंदिर बांसवाड़ा
  •  मंडलीश्वर शिवालय बांसवाड़ा
  • आथूणा के मंदिर बांसवाड़ा
  • महादेव का मंदिर बांसवाड़ा
  • लक्ष्मीनारायण का मंदिर बांसवाड़ा
  • त्रिपुर सुंदरी मंदिर बाँसवाड़ा
  • भीलेश्वर महादेव बांसवाड़ा
  • सूर्यमदिर बांसवाड़ा
  • नन्दिनी माता तीर्थ बांसवाड़ा
  • दत्त मदारेश्वर महादेव मंदिर बांसवाड़ा

घोटिया अम्बा मंदिर बांसवाड़ा Ghotia Amba Temple Banswara –

बांसवाड़ा के मंदिर यहां अम्बा माता धाम के अलाणा घोटेश्वर महादेव, पाण्डव कुंड और केपालानी पवित्र तीर्थ हैं ! माना जाता है कि पांडवो ने वनवास का कुछ किमी. दूर भीमकुण्ड है जो सुरंग द्वारा घोटिया अंबा से जुडा है ! भीमकुण्ड से लगभग 7 किमी. दूर रामकुण्ड’ है जो चारों ओर से सुरम्य पहाड़ियों से घिरा हुआ है ! इसे फातीखान भी कहते हैं ! यह पूरे वर्षभर बहुत ठंडे रहने वाले पानी का एक कुंड है !
 अंदेश्वर पार्श्वनाथ जी कुशलगद तहसील में एक छोटी पहाड़ी पर स्थित प्रसिद्ध जैन मंदिर !

धूणी के रणछोड मंदिर बांसवाड़ा Dhuni’s Ranchod Temple Banswara –

यह महाभारत कालीन तीर्थ माना जाता है यह उदयपुर मार्ग पर गनोड़ा के निकट स्थित है ! यहाँ भगवान रणछोड़ण्य की प्रतिमा है ! इन्हें हर मनोकामना पूर्ण करने वाला और फसलों के रक्षक देव के रूप में पूजा जाता है ! प्रतिवर्ष फाल्गुन शुभता एकादशी (आपला एकादशी) को यहाँ मेला भरता है ! बांसवाड़ा के मंदिर में रणछोड़ भी बहुत ही प्रसिद मंदिर माना जाता है !
  •  विट्ठल देव का मंदिर यह भगवान कृष्ण का मंदिर है !
  • कालिंजरा मंदिर कालिंजरा गाँव बाँसवाड़ा में हारन नदी के किनारे पर बसा है ! जहाँ ऋषभदेव जी का प्रसिद्ध जैग मंदिर है !

ब्रह्मा मन्दिर Brahma Mandir Banswara –

ब्रह्मा मंदिर हिंछ महाँ विक्रम संवत् की 12वीं शती का ब्रह्माजी का मंदिर है ! जिसमें ब्रह्माजी की सामधातु की आदमकद चतुर्मुखी मूर्ति विराजमान है ! तथा (बाँसवाड़ा) पास में आंबलिया तालाब की पाल पर छिछा देवी का प्राचीन मंदिर है ! महाराषल उग्रसेन के पोते और उदयभाष के बेटे महाराषत समरसिंह के राज्य काल में सोलंकी नानक के बेटे देवीदास ने ! भगवती छिछा देवी का मंदिर बनवाया था ! और ब्रह्मा की वर्तमान मूर्ति की स्थापना जगमाल सिंह ने की थी !

यहाँ 1495 ई.का एक स्तम्भ लेख मौजूद है जिससे ज्ञात होता है कि ! कल्ला के बेटे देवदन ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया ! बांसवाड़ा के मंदिर ब्रह्मा मंदिर से सय हुआ एक तालाब है जिस पर एक घाट बना हुआ है.  जो ब्रह्मा पाट कहलाता है !

  • मंडलीश्वर शिवालय पानाहेड़ा में नागेला तालाब की पाल पर स्थित शिवालय जिसको वागड़ के परमार राजा मंडलीक ने 1059 में बनवाया था !

आथूणा के मन्दिर बांसवाड़ा Athuna Temple Banswara –

आथूणा के बांसवाड़ा के मंदिर की गली तहसील में स्थित ये मंदिर वागड़ के परमार राजाओं (11वीं-12वीं सदी) द्वारा निर्मित हैं ! उस समय आथूणा परमारों की राजधानी थी ! प्राचीन ग्रंथों में इसका नाम उत्थूनक मिलता है ! आपूर्णा में प्राचीनतम मंदिर गंगेला (गमेला) तालाब के पास स्थित मण्डलेश्वर महादेव मंदिर है ! यह मंदिर सप्तायतन शैली में निर्मित है व पूर्वाभिमुखी है ! मंदिर में स्थित शिलालेख से ज्ञात होता है. कि इसे वागड़ के परमार शासक मंडलीक के पुत्र चामुण्डाराज ने अपने पिता को स्मृति में वि.सं. 1136 (31 जनवरी, 1080) में बनवाया था !
यह शिव-पंचायतन मंदिर था !  और भगवान शिव को समर्पित मंदिरों की अधिकता है यहाँ एक मंदिर समूह हनुमानगढ़ी भी है ! इस समूह में एक हनुमान का, एक वराह का, एक विष्णु का और तीन शिव के मंदिर है !
हनुमानगढ़ी में नीलकंठ महादेव का मंदिर सबसे बड़ा मंदिर है ! बांसवाड़ा आर्थुणा के अन्य मंदिर हैं – सोमनाथ का मंदिर, नीलकण्ठमहादेव मंदिर, कनफटे साधुओं का मंदिर, कुंभेश्वर मंदिर, गदाधर का मंदिर आदि ! बांसवाड़ा के मंदिर आथूणा को प्राचीन व’खंडित मंदिरों का गाँव’ भी कहते हैं !
  • लक्ष्मीनारायण का मंदिर यह मंदिर महारावल पृथ्वीसिंह को राठौड़ राणी अनोपवरी ने 1799 में बनवाया था !

त्रिपुर सुंदरी मन्दिर बाँसवाड़ा Tripura Sundari Mandir Banswara –

बांसवाड़ा के मंदिर में डूंगरपुर हाईवे पर तलवाड़ा ग्राम से पाँच किमी. दूर स्थित उमराई गाँव में. राज राजेश्वरी ‘त्रिपुर-सुंदरी माता’ का मंदिर स्थानीय लोगों में ‘तुरताई माता के नाम से भी जाना जाता है ! यहाँ कोले पत्थर की देवी की अष्टादश (18) भुजा की मूर्ति विद्यमान है ! मूर्ति की पीठिका पर मध्य में श्रीयंत्र अंकित है ! देवी के पैरों पर’ श्रीचक्र’ अंकित है मंदिर के त्रिपुर नाम का संदर्भ प्राचीन काल के तीन पुरों से था ! शक्तिपुर, शिवपुर और विष्णुपुर में स्थित होने के कारण इसका नाम त्रिपुरसुन्दरी पला ! नवरात्र पर यहाँ उत्सव व मेले‌आयोजन किया जाता है यह पांचालों की कुलदेवी है !
  •  भीलेश्वर महादेव  – महारावल जगमाल ने यह मंदिर बनवाया !
  • सूर्यमदिर – तलवाड़ा में ही एक सूर्य मंदिर है जो 11वीं सदी का बना हुआ है ! इसी में श्वेत पत्थर से निर्मित नवग्रहों की मूर्तियाँ स्थापित हैं !

नन्दिनी माता तीर्थ मन्दिर Nandini Mata Teerth Temple Banswara –

बांसवाड़ा के मंदिर में बड़ोदिया नामक कस्बे के निकट विशाल पहाड़ी की चोटी पर नन्दिनी माता का प्राचीन मंदिर स्थित है ! यहाँ श्वेत प्रस्तर से निर्मित अष्टभुजा देवी की प्रतिमा है ! पहाड़ पर दर्शनार्थियों द्वारा पत्थर के छोटे-छोटे घरोदें बनाने की परम्परा है ! पौष पूर्णिमा को यहाँ भव्य मेला भरता है !

दत्त मदारेश्वर महादेव मन्दिर Datta Madareshwar Mahadev Temple Banswara –

बाँसवाड़ा शहर के उत्तर-पूर्व में भगवान शिव का यह प्रसिद्ध मॉदर स्थित है जिसमें पहाड़ों में गुफा में चट्टानें काटकर बनाया गया ‌! विशाल शिवलिंग है ! बांसवाड़ा के मंदिर में यह मंदिर भी दर्सनिय माना जाता है !

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