बुटाटी धाम मंदिर चतुरदास जी महाराज Butati Dham Temple

बुटाटी धाम मंदिर हेलो दोस्तों हम आपको राजस्थान के नागौर जिले मे स्थित विश्व प्रसिद्ध बुटाटी मंदिर ! चतुरदास जी महाराज का मंदिर स्थित है ! ग्राम बूटाटी नागौर से 50 कि.मी. दूर अजमेर और नागौर मार्ग पर कुचेरा के पास स्थित है ! इस मंदिर’ को यहाँ ‘चतुरदास जी महाराज के मंदिर’ के नाम से जाना जाता है ! इस मंदिर में चतुरदास जी की समाधि है यहां पर लकवा रोग से पीड़ित लोग आते हैं ! और कुछ ही दिनों में स्वस्थ होकर चले जाते हैं ! चतुरदास जी महाराज और इस मंदिर के चमत्कार के बारे में हम आपको पूरी जानकारी देंगे !

बुटाटी धाम मंदिर चतुरदास जी महाराज का परिचय  Butati Dham Temple Chaturdas Ji Maharaj –

  • नाम – संत श्रीचतुरदास जी महाराज
  • जन्म – चारण वंश
  • मंदिर का स्थान – गाँव बुटाटी, नागौर से 50 किलोमीटर दुर
  • पिन कोड – 341514
  • बुटाटी मंदिर के मोबाइल नंबर/Contact no. – ,08529248984 , 07742887788 , 09783375021
  • जिला – नागौर
  • राज्य – राजस्थान , ( भारत )

बीमारी का इलाज – यहा पर लकवा रोग ( Paralysis ) की बीमारी दूर हो जाती है

इस धाम की कई बार जांच पड़ताल हो चुकी है की यहां पर ऐसा क्या चमत्कार है की जो इलाज अस्पतालों में नहीं होता ! वो यहा पर सिर्फ सात परिक्रमा लगाने से हो जाता है ! संत श्रीचतुरदास जी महाराज की इस धाम बुटाटी धाम मंदिर और चमत्कारों के सामने विज्ञान और डॉक्टर भी नतमस्तक है !

ऐसी मान्यता है कि यहां लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व संत चतुरदास जी का यहाँ पर निवास स्थान था ! चारण कुल में जन्म हुआ था चतुरदास जी का यह एक महान सिद्ध योगी संत थे और इन्होंने अपनी सिद्धियों से लकवाग्रस्त रोगियों को रोगमुक्त कर देते थे ! और आज भी लोग लकवा से मुक्त होने के लिए इनकी समाधी पर सात फेरी लगाते हैं ! यहाँ पर पूरे देश से ही नहीं विदेशों से भी प्रतिवर्ष लाखों लकवा मरीज एवं अन्य श्रद्धालु अपनी आस्था के रूप से बुटाटी धाम मंदिर एकादशी और द्वादशी के दिन आते है !

  • चतुरदास जी महाराज का उत्सव हर महीने

बुटाटी में हर महीने की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मेला लगता है। इसके अलावा वैशाख , भाद्रपद और माघ महीने में विशेष मेलों का आयोजन होता है।

चतुरदास जी महाराज बुटाटी धाम के चारो और सात बार परिक्रमा Butati Dham in hindi 

बुटाटी धाम मंदिर में सात परिक्रमा द्वारा लकवा के रोग से मुक्त कराने के लिए विश्व प्रसिद्ध है ! यहाँ पर लकवा के मरीजों को सात दिन का रहते हुए रोज एक परिक्रमा लगानी होती है ! सुबह की आरती के बाद पहली परिक्रमा मंदिर के बाहर तथा शाम की आरती के बाद दूसरी परिक्रमा मंदिर के अन्दर लगानी होती है ! ये दोनों परिक्रमा मिलकर पूरी एक परिक्रमा कहलाती है ! सात दिनो तक मरीज को इसी प्रकार परिक्रमा लगानी होती है !

यहाँ पर मरीज के परिजन नियमित लगातार 7 मन्दिर की परिक्रमा लगवाते हैं- हवन कुण्ड की भभूति लगाते हैं ! और बीमारी धीरे-धीरे अपना प्रभाव बिल्कुल कम कर देती है ! शरीर के अंग जो हिलते डुलते नहीं हैं वह धीरे-धीरे अच्छे से काम करने लगते हैं !

  • बुटाटी गांव की स्थापना

माना जाता है की बुटाटी गांव की स्थापना 1600 ई. की शुरूआत में हुई ! पैराणिक मान्यता और बुजुर्गो के कहे अनुसार बुरा लाल शर्मा (दायमा) नामक बाह्मण ने बुटाटी गांव की स्थापना की ! उसी के नाम पर बुटाटी गांव का नामकरण हुआ था इसके बाद बुटाटी पर राजपुतो का अधिकार हो गया ! बुटाटी पर भौम सिंह नाम के राजपुत ठाकुर ने इस पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया उसके बाद बुटाटी नये नाम भौम सिंह जी की बुटाटी धाम मंदिर के नाम से जानी जाने लगी !

बुटाटी ग्राम में पश्चिम दिशा में संत श्री चतुरदास जी महाराज का मंदिर स्थित है और यह मंदिर आस्था का विश्व प्रसिद्ध केन्द्र है ! इस मंदिर में आए लकवाग्रस्त पिडीत सिर्फ सात परिक्रमा में एकदम सम्पूर्ण स्वस्थ होकर अपने घर जाता है !

चतुरदास जी महाराज मंदिर में भवन और सुविधाएं Chaturdas Ji Maharaj Temple –

बुटाटी धाम मंदिर परिसर के चारों ओर चार दिवारी व दरवाजे बने हुए है ! मंदिर के बाहर से आने वाले यात्रीयों के लिए बिस्तर,भोजन पीने के लिए ठण्डा पानी, खाना बनाने के लिए समान व बर्तन, जलाने के लिए लकङी सात दिन रूकने के लिए कमरे आदि ! व्यवस्थाएं निःशुल्क होती है !

नहाने धोने के लिए परिसर में समुचित व्यवस्था है –

यहां पर शौचालय भी बने हुए है। मंदिर परिसर में पानी की एक बड़ी टंकी तथा पानी ठंडा करने के लिए जगह-जगह ठंडे पानी की मशीने लगी है ! बुटाटी धाम मंदिर परिसर के बाहर की ओर लगभग 100 से अधिक दुकानें है यात्रियों के निवास के लिए यहाँ सुविधा युक्त धर्मशालाएं हैं ! श्रद्धालु ओ के आवश्यक ता अनुसार और उनको पूरी सुविधा का सभी सामान बिस्तर , राशन , खाना ,बर्तन, खाना बनाने के लिए लकड़ियाँ आदि निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं !

समिति Butati Temple

बुटाटी धाम मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने का पूरा कार्य भार मंदिर ट्रस्ट का है इस लिए एक समिति का गठन किया गया है ! जिसमें एक अध्यक्ष सहित ५० सदस्य हैं !


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