भटनेर दुर्ग हनुमानगढ़ का इतिहास Bhatner Fort

भटनेर दुर्ग राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित यह एक अनोखा दुर्ग है आज हम इसके इतिहास और इसके बारे में विस्तार से जानेगे 

भटनेर दुर्ग हनुमानगढ़, भटनेर किला राजस्थान Bhatner Fort Hanumangarh

  • पूरा नाम भटनेर का किला या भटनेर दुर्ग ( Bhatner Fort)
  • निर्माता- इस के किले का निर्माण राजा भूपत भाट्टी ने
  • निर्माण कब हुआ – 1295 ई. में
  • यह भटनेर किला राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित है !
  • दुर्ग की श्रेणी – भटनेर का किला धान्वन दुर्ग की श्रेणी में आता है !  इस किले के पास से घग्घर नदी बहती है !
  • वास्तुकार भटनेर के किले का वास्तुकार कैकेया था !

भटनेर दुर्ग का निर्माण हनुमानगढ़ में घग्घर नदी के मुहाने पर हुआ हैँ  इस दुर्ग के निर्माता भाटी राजा भूपत ने तीसरी शताब्दी में करवाया था !
और इस दुर्ग का मुख्य शिल्पी केकेया था ! दुर्ग का पुनः निर्माण 12 वीं शताब्दी में महारावल शालिवाहन के वंशज राजा अभयराव भाटी द्वारा करवाया गया था ! यह भटनेर किला राजस्थान का सबसे प्राचीन दुर्ग माना जाता हैँ !

भटनेर दुर्ग का इतिहास Bhatner Fort history in hindi

यह दुर्ग ‘धान्वन दुर्ग’ व ‘जल दुर्ग‘ की श्रेणी में आता है ! ध्यातव्य रहे भटनेर दुर्ग पर सर्वाधिक विदेशी आक्रमण हुए और कहा जाता हैँ ! की यह दुर्ग भाटी शासक  के द्वारा बना होने के कारण इसका नाम भटनेरदुर्ग या भटनेर किला रखा ! बीकानेर के महाराजा सूरतसिंह द्वारा 1805 ई. में मंगलवार के दिन दुर्ग हस्त गत किये जाने के कारण इस भटनेर किले का नाम हनुमानगढ़ कर दिया गया ! इस दुर्ग को उत्तरी सीमा का प्रहरी कहा जाता हैँ क्योंकि एशिया के बिच में होने वाले आक्रमण पहले  इसी किले पर होते थे !

दुर्ग में गोरखनाथ का मंदिर है जिसका निर्माण राव ठाकुर री राठौड़ के पुत्र बाघा ने करवाया ! इस दुर्ग के एक प्रवेश द्वार पर 1608 ई. का फारसी लिपि का लेख उत्कीर्ण है जिसके अनुसार राव मनोहर कछवाहा ने शाही आज्ञा से वहाँ मनोहरपोल नामक दरवाजा बनवाया !

भटनेर किले के प्रभावी आक्रमण  –

भटनेरदुर्ग राजस्थान का सबसे प्राचीन किला है ! यह भटनेर दुर्ग राजस्थान का एकमात्र ऐसा किला है जहा से मुस्लिम महिलाओ के जोहर का प्रमाण मिलता है !

  • 1398 ई. –

तैमुर लंग ने 1398 ई. मे भटनेर के दुर्ग पर आक्रमण किया इस आक्रमण के समय भटनेर का शासक दुलचन्द भाट्टी था ! इस भटनेर दुर्ग में राजस्थान मे सर्वाधिक विदेशी आक्रमणो का सामना करने वाला किला है !

तैमूर ने अपनी आत्मकथा ‘तुजुक-ए-तैमूरी’ में लिखा है कि

मैंने इतना मजबूत व सुरक्षित किला पूरे हिंदुस्तान में नहीं देखा 

1398 ई. में भयाक्रांत आक्रमणकारी तैमूर लंग ने आक्रमण किया ! इससे दुर्ग के शासक दूलचंद भाटी युद्ध करता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ और महिलाओं ने जौहर किया था ! यह एक अनोखा जौहर था जिसमें हिंदु स्त्रियों के साथ मुस्लिम स्त्रियों ने भी जौहर किया था ! ध्यातव्य रहे- भारत में सबसे बड़ा कल्ले आम इसी दुर्ग में तैमूर लंग के आक्रमण के समय ही हुआ था ! गुलाम वंश के सुल्तान बलबन का चचेरा भाई शेरखाँ की विक्रम संवत् 1326 (1269 ई.) में भटनेर में ही मृत्यु हो गई थी ! उसकी कब्र आज भी किले के अंदर है !

हनुमानगढ़ जिले का इतिहास

भटनेर दुर्ग प्राचीन काल में योद्धेय क्षेत्र के रूप में अपनी पहचान रखने वाला हनुमानगढ़ क्षेत्र विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं के पुरावशेष अपने में समेटे हुए है ! यहाँ मिव सभ्यता (नील नदी सभ्यता) और सिंधु सभ्यता से भी पूर्व की पूर्व हड़प्पा सभ्यता’ ! तथा हड़प्पा कालीन सभ्यता के अवशेष कालीबंगा में उत्खनन में प्राप्त हुए हैं ! यहाँ विश्व के प्राचीनतम जुते हुए खेत के प्रमाण भी मिले हैं !

स्वतंत्रता के पश्चात् यह क्षेत्र श्रीगंगानगर जिले का ही एक अंग था ! और श्री गंगानगर से 12 जुलाई, 1994 को पृथक होकर राज्य का स्वतंत्र 31वाँ जिला बना ! यह क्षेत्र घग्घर नदी की बाढ़ों के लिए प्रसिद्ध है जिसका कारण इस क्षेत्र का तल यहाँ बहने वाली घग्घर नदी के पाट से नीचा होना है ! यादवों के वंशज भट्टी ने यहाँ अपना राज्य स्थापित किया ! उसके पुत्र भूपत ने सन् 285 में भटनेर (वर्तमान हनुमानगढ़) के किले का निर्माण किया था ! इसी के वंशज भाटी कहलाए भटनेर दुर्ग मध्यकाल में राजस्थान की उत्तरी सीमा का प्रहरी कहलाता था !
हनुमानगढ़ के उत्तर में हरियाणा व पंजाब, पूर्व में हरियाणा, पश्चिम में श्रीगंगानगर और दक्षिण में चुरू जिला है !

  •  हनुमानगढ़ में केवल घग्घर नदी बहती है !

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