भरतपुर के पर्यटन स्थल – भरतपुर के प्रसिद पर्यटन स्थल, tourist spot

भरतपुर के पर्यटन स्थल ( Bharatpur tourist places ) हेलो दोस्तों आज हम आप को राजस्थान के भरतपुर जिले के पर्यटन व दर्शनीय स्थल के बारे बतायेंगे ! अगर आप कभी राजस्थान के भरतपुर जिले में घुमने के लिए जाते है ! तो यह भरतपुर के पर्यटन स्थल आपको देखने चाहिए इसकी पूरी जानकरी के लिए इसे पढे जिससे आप को महत्वपूर्ण जानकरी मिलेगी !

भरतपुर के पर्यटन स्थल में लोहागढ़ दुर्ग (rajasthan Bharatpur tourist places in hindi)

दोस्तों राजा सूरजमल जाट द्वारा निर्मित ऊँची प्राचीर युक्त भीमकाय दुर्ग जिसके चारों ओर पानी की 18.3 मीटर चौड़ी खाई है ! इस आयताकार दुर्ग को 8 बर्जियों द्वारा मजबूती प्रदान की गई है ! इनमें जवाहार ज साधिक महत्त्वपूर्ण है ! इसमें सुजान गंगा नहर द्वारा मोती झील का पानी आता है  ! इस दुर्ग में प्रवेश के केवल दो दरवाजें हैं-1. उत्तर की और का अष्टधातु दरवाजा एवं 2. दिक्षण दिशा में चौबुर्जा दरवाजा ! दुर्ग कुल तीन दीर्घाएँ मौजूद हैं जिनमें से एक में पौराणिक आख्यानों का चित्रण है ! यहाँ महाराजा बृजेन्द्र सिंह द्वारा एक लौह स्तम्भ पर जाट शासकों की वंशावली अंकित है ! इसी दुर्ग में भरतपुर महल एवं किशोरी महल स्थित है ! यह भरतपुर के पर्यटन स्थल में सबसे सुंदर है जो आपको देखना चाहिए !

जवाहर बुर्ज भरतपुर के पर्यटन स्थल (tourist places in hindi)

भरतपुर किले के उत्तर-पश्चिम पार्श्व में जवाहर बुर्ज वह ऐतिहासिक स्थल है जहाँ से जवाहर सिंह ने दिल्ली पर चढ़ाई के लिए कूच किया था ! दिल्ली विजय (मुगलों पर) की याद को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए ! उन्होंने 1765 में किले में इसी स्थल पर एक विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया था !

  • केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य भरतपुर के पर्यटन स्थल में देखने के लिए प्रसिद

विश्व प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य जो ‘साइबेरियन सारस’ के लिए प्रसिद्ध है। 1982 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया ! यह यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर सूची में 1985 में शामिल किया गया यह प्रसिद्ध ‘रामसर स्थल’ (Ramsar Site) भी है !

भरतपुर संग्रहालय (Bharatpur Museum tourist places)

यह लोहागढ़ दुर्ग में कचहरी कलां’ भवन में स्थित है जिसका उद्घाटन 11 नवम्बर, 1944 को किया गया ! कचहरी कलां’ भवन महाराजा बलवंत सिंह के समय बनाया  गया ! यह भरतपुर के पर्यटन स्थल में आता है !

  • धौलपुर महल भरतपुर के पर्यटन स्थल – भरतपुर मे स्थित यह महल भरतपुर-धौलपुर के लाल पत्थर से बनाया गया है !
  • बयाना –

पुराणों में बयाना के निकट के पर्वतीय अंचल को शोणितगिरी तथा बयाना नगर को शोणितपुर कहा गया है ! इसका प्राचीन नाम’ श्रीपंथ’ तथा ‘भादानक’ था बयाना की ख्याति इसके पास स्थित अनगिनत कब्रगाहों के कारण भी रही है ! अतः इसे कब्रगाहों का शहर भी कहते हैं ! मध्यकाल में यह क्षेत्र अनेकानेक ऐतिहासिक युद्धों का केन्द्र स्थल रहा है ! इसमें दिवंगत हुए मुसलमान यौद्धाओं की सैकड़ों मजारें आज भी बीते युग की एक विरासत के रूप में विद्यमान हैं ! वह बयाना में ऊषा मस्जिद, लोदी मीनार, झजरी, इस्ला गेट, सदुल्ला खान सराय, ! अकबर की छतरी, जहाँगीरी दरवाजा एवं ब्रह्मवाड़ ईदगाह आदि राष्ट्रीय महत्व के घोषित ऐतिहासिक स्मारक हैं !

रूपवास पर्यटन स्थल ( rajasthan tourist places)

मुगल सम्राट अकबर द्वारा बनाए गए फतेहपुर सीकरी के समीप होने से रूपवास का क्षेत्र ! अकबर की आखेट स्थली के रूप में काफी प्रसिद्ध रहा है ! यहाँ अकबर के मृगया महल दर्शनीय हैं यहाँ निकट ही खानवा की प्रसिद्ध युद्ध स्थली भी स्थित है ! रूपवास का वर्णन जहाँगीरने रूपसिंह की जागीर के रूप में किया है, जिसे बाद में अमानुल्लाह खाँ को दे दिया गया था ! रूपसिंह को चित्तौड़ के राणाओं का वंशज माना जाता है ! वह रूपसिंह ने यहाँ 17वीं सदी में लाल बलुआ पत्थरों से एक महल ‘लाल महल’ का एवं एक जलाशय का निर्माण करवाया था ! जोकि भरतपुर के पर्यटन स्थल में देखने योग्य है !

  • वैर भरतपुर के पर्यटन स्थल –

वैर कस्बे की स्थापना प्रतापसिंह  ने 1726 ई. में की थी। यह महाराजा सूरजमल के भाई  था ! यह वैर बाग-बगीचों का कस्बा कहलाता है ! नौलखा बाग, वैर का किला, प्रताप फुलवारी, ऊँटाला का किला, फुलवाड़ी महल आदि ! यहाँ के दर्शनीय स्थलो के नाम से प्रसिद्ध  हैं ! और इसे भरतपुर जिले की लघुकाशी भी कहते हैं !

  • कामां भरतपुर के पर्यटन स्थल –

काम्यक वन, कदम्ब वन और कामवन के नाम से पौराणिक ग्रंथों में वर्णित ! कामां को प्राचीनकाल में ब्रह्मपुर के नाम से भी संबोधित किया जाता था ! यहाँ पुष्टि मार्गीय बल्लभ संप्रदाय की दो पीठ स्थापित हैं- प्रथम गोकुल चन्द्रजी एवं द्वितीय मदन मोहन जी का प्रसिद्ध मंदिर ! वह कामां में ‘चौरासी खम्भा’ के नाम से प्रसिद्ध एक आयताकार स्मारक है ! जिसमें पूर्वाभिमुख पर अंकित एक अरबी फारसी लेख के अनुसार हिजरीसन् 600 (ईस्वी सन् 1222) में इसका निर्माण ! एक अमीर सेठ ने करवाया था कामां का चील महल’ भी प्रसिद्ध इमारत है !

भरतपुर के पर्यटन स्थल प्राचीन टीला मलाह – Bharatpur tourist places

केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य के पास भरतपुर में स्थित इस प्राचीन टीले के उत्खनन में ! ईसा पूर्व प्रथम सदी की चित्रित धूसर भाण्ड (Painting Grayware) संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए हैं !

  • बयाना दुर्ग भरतपुर के पर्यटन स्थल –

दोस्तों इसे महाराजा विजयपाल ने अपनी राजधानी मथुरा को असुरक्षित जानकर ! यह दुर्ग मानी (दमदमा) पहाड़ी पर 1040 ई. (11वीं सदी) के लगभग इस का निर्माण कराया था ! यह बयाना दुर्ग के भीतर लाल पत्थरों से बनी भीम लाट है इसे विष्णुवर्द्धन ने बनवाया था ! यहाँ इब्राहीम लोदी द्वारा बनवाई गई लोदी मीनार भी है ! इसी दुर्ग में महाराजा सूरजमल का राज्याभिषेक हुआ था ! और इस दुर्ग को  बादशाह दुर्ग, विजयगढ़  एवं बाणासुर का किला भी कहते हैं  !

  • खानवा, भरतपुर –

गंभीर नदी के शांत तट पर स्थित खानवा भरतपुर से लगभग 32 किमी पूर्व में रूपवास तहसील में है ! यहाँ बाबर एवं मेवाड़ के महाराणा सांगा के मध्य 17 मार्च, 1527 को महासमर (खानवा का युद्ध) हुआ था ! जिसमें बाबर विजयी हुआ तथा भारत में मुगल साम्राज्य स्थाई हो गया ! यहीं पर बलराम, रेवती तथा चक्रधर दो भुजावाले विष्णु की विशाल मूर्तियाँ भी विराजमान हैं !

  • सीकरी बाँध भरतपुर के पर्यटन स्थल –

यह बांध भरतपुर में स्थित है इस बाँध को रूपारेल नदी के बाढ़ के पानी से होने वाली तबाही से बचाव के लिए निर्माण किया गया !

नगला जहाज

भरतपुर के पर्यटन स्थल में इस गाँव में ग्वालों के रक्षक व पालनहार लोकदेवता  देवबाबा का ये प्रसिद्ध मंदिर है ! जो गुर्जर समुदाय का विशेष आस्था का केंद्र है ! जहां इस समुदाय के लोग देवबाबा को खीर का प्रसाद चढ़ाते हैं ! यहां साल में दो बार लक्खी मेला लगता है ! इसमें देशभर से गुर्जर समुदाय के लोग बाबा के दर्शन करने आते हैं !

  • नगला छैल – 

बयाना तहसील में स्थित इस पुरातात्विक स्थल पर गुप्तकालीन सिक्कों का राजस्थान में सबसे बड़ा भण्डार मिला है ! इसके अलावा जिले के ‘मलाह’ स्थान पर भी ताम्रयुगीन अस्त्र-शस्त्रों का भण्डार प्राप्त हुआ है !

भरतपुर के पर्यटन स्थल में डीग (Deeg in Bharatpur tourist place)

डीग भरतपुर की प्राचीन राजधानी रहा है यह कस्बा भव्य जल महलों के लिए प्रसिद्ध है डीग को जलमहलों की नगरी कहते हैं ! दोस्तों भरतपुर के पर्यटन स्थल  में यह खास है ! अधिकांश महल बंशी पहाड़पुर के बादामी रंग के बलुई पत्थर से ! सन् 1755-1763 के बीच महाराजा सूरजमल एवं उनके पुत्र जवाहरसिंह द्वारा बनाये गये है !

दोस्तों डीग के भवनों के योजना विन्यास का केन्द्र इसका वर्गाकार उद्यान है, जिसके चार भुजाओं पर चार इमारतें खड़ी हैं ! तथा पूर्वी व पश्चिमी पृष्ठभूमि में क्रमशः गोपाल सागर तथा रूपसागर नामक विशाल सरोवर हैं ! दक्षिण , उत्तर ,पश्चिम व पूर्व में क्रमश: किशन भवन , गोपाल भवन,
नंदभवन तथा केशव भवन की अवस्थिति है ! गोपाल भवन के अनुपूरक के रूप में दक्षिणी व उत्तरी  छोर पर क्रमशः ‘सावन तथा भादों भवन’ स्थित है ! समूह की अन्य इमारतों में उद्यान के  पश्चिमी दक्षिणी कोने पर स्थित तथा किशन भवन से लगा हुआ !  हरदेव भवन  तथा सूरज भवन है। उत्तरी छोर पर स्थित सिंहपोल मुख्य प्रवेश द्वार है !

इसके अतिरिक्त दो अन्य प्रवेश द्वार-नंगा द्वार व सूरज द्वार है जो क्रमशः दक्षिणी पश्चिमी व उत्तर पूर्वी कोने पर स्थित है ! जाट स्थापत्य शैली में निर्मित इन महलों पर राजपूत शैली एवं मुगल स्थापत्य शैली के कई तत्त्वों का मिश्रण है ! गोपाल भवन एवं किशन भवन में एक संग्रहालय है ! जिसमें रियासत कालीन प्रदर्शों के माध्यम से तत्कालीन जीवन शैली को जीवंत दर्शाने का प्रयास किया गया है ! डीग का  भारतीय मंदिर लक्ष्मण मंदिर स्थापत्य शैली का अद्भुत नमूना है ! यह भरतपुर के पर्यटन स्थल में महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है !

  • महाराजा सूरजमल का महाराणा सांगा तथा पैनोरमा  का स्मारक एवं पैनोरमा भी भरतपुर में स्थित है !

डीग के भवन पर्यटन स्थल (Deeg Ke Bhawan Bharatpur tourist places)

  • भरतपुर के पर्यटन स्थल  गोपाल भवन – 

अपनी विशालता, सटीक अवस्थिति व उत्कृष्ट वास्तुशिल्प के कारण गोपाल भवन डीग का सर्वोत्तम भवन है ! गोपाल भवन के पीछे रानी बाग है। गोपाल भवन गोपाल सागर झील में स्थित है !

  • सूरज भवन – 

धवल संगमरमर के इस सुंदर भवन का नामकरण निर्माता सूरजमल के नाम पर किया गया ! इस भवन में संगमरमर की पट्टिकाओं पर मुगल शिल्पियों द्वारा पित्रा-ड्यूरा शैली में उत्खचित पौधे भवन की सुंदरता को बढ़ा देते हैं !

  • हरदेव भवन भरतपुर के पर्यटन स्थल – सूरज भवन के ठीक पीछे स्थित आकर्षक उद्यानयुक्त भवन !
  •  किशन भवन – यह परिसर के दक्षिण भाग में स्थित है। इस भवन के मेहराब अरबस्क शैली के अलंकरण से पूर्णतः सुसज्जित हैं।
  • केशव भवन –  बारादरी के नाम से ज्ञात इस भवन के एक ओर रूपसागर है
  • नंद भवन – यह आयताकार भवन एक प्रेक्षागृह की भाँति है !
  • केन्द्रीय उद्यान –  परिसर के ठीक केन्द्र में स्थित उद्यान चारबाग पद्धति पर बना है ! जो जोड़ का चिह्न बनाती चार नहरों व उनके कटान पर स्थित एक अष्टभुजीय ताल से परिपूर्ण हैं !
  • पुराना महल – रूपसागर के दक्षिण में एवं डीग भवन परिसर से बिल्कुल लगता हुआ ! यह पुराना महल बदनसिंह द्वारा निर्मित किया गया ! यह भवन अपने स्थापत्य सौंदर्य के कारण महत्त्वपूर्ण है !

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