रणथम्भौर दुर्ग का इतिहास Ranthambore Fort

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रणथम्भौर दुर्ग का इतिहास - Ranthambore Fort
रणथम्भौर दुर्ग का इतिहास - Ranthambore Fort

नमस्कार दोस्तों आज हम आप को राजस्थान के प्रमुख दुर्गो में से एक रणथम्भौर दुर्ग के इतिहास के बारे बतायेंगे

रणथम्भौर दुर्ग का परिचय Introduction to Ranthambore Fort – 

  • नाम – रणथम्भौर दुर्ग
  • जिला – सवाईमाधोपुर
  • राज्य – राजस्थान ( भारत )
  • किस ने बनवाया – रणथम्मन देव ने
  • कब बना – 994 ई.
  • दुर्ग का आकार – विषम आकार वाली सात पहाड़ियों से घिरा हुआ है !
  • अभ्यारण घोषित कब किया – राज्य सरकार ने रणथम्भौर दुर्ग को 1955 में अभ्यारण घोषित किया !
  • 1 नवंबर 1980 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया यह राज्य का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान है !

सवाईमाधोपुर जिले में स्थित रणथम्भौर दुर्ग अरावली पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा थंभोर पहाड़ी पर स्थित एक विकट दुर्ग है ! जो 994 ई. में रणथम्मन देव द्वारा बनाया गया था ! थंभोर पहाड़ी के नीचे की पहाड़ी का नाम ‘रण’ है ! इस किले में गिरि दुर्ग व वन दुर्ग दोनों की विशेषताएँ हैं ! इसकी स्थिति कुछ ऐसी है कि यह दूर से दिखाई नहीं देता है ! जबकि इसके ऊपर से शत्रु सेना आसानी से देखी जा सकती है ! यह दुर्ग चतुर्दिक पहाड़ियों से घिरा है जो इसकी नैसर्गिक प्राचीरों का काम करती हैं ! इस दुर्ग का वास्तविक नाम ‘रन्तः पुर’ है जिसका अर्थ है रण की घाटी में स्थित नगर ! अन्य सब दुर्ग नंगे हैं जबकि यह दुर्ग बख्तरबंद है !

रणथम्भौर दुर्ग में प्रसिद्ध Famous in Ranthambore Fort in hindi

प्रसिद्ध गणेशजी का मंदिर पीर सदरुद्दीन की दरगााह, सुपारी महल, जौरां-भौरा, जोगी महल, बादल महल, हम्मीर महल, जौहर महल, हम्मीर की कचहरी, रनिहाड़ तालाब दर्शनीय स्थल हैं ! पद्मला तालाब आदि भी इसी में स्थित है रणथम्भौर दुर्ग का प्रमुख दरवाजा नौलखा दरवाजा है ! दुर्ग के दूसरे प्रमुख दरवाजे हैं ! हाथीपोल, गणेशपोल, सूरजपोल एवं त्रिपोलिया दरवाजा !अजमेर शासक पृथ्वीराज तृतीय के तराइन के द्वितीय युद्ध में हार जाने के बाद उसके पुत्र गोविन्दराज ने यहाँ अपना शासन स्थापित किया था !

रणथम्भौर किले के बारे में About Ranthambore Fort hindi

  • सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक हम्मीर देव चौहान
  • अलाउद्दीन खिलजी ने दुर्ग पर आक्रमण –

रणथम्भौर दुर्ग हम्मीर देव चौहान यहाँ का सर्वाधिक प्रतापी व प्रसिद्ध शासक था ! उन्होंने दिल्ली सुलतान अलाउद्दीन खिलजी के विद्रोही सेनापति मुहम्मदशाह को शरण प्रदान की ! जिससे क्रोधित हो अलाउद्दीन खिलजी ने 1300 ई. में रणथंभौर किले पर आक्रमण कर दिया ! कई दिनों तक भी सफलता न मिलने पर अलाउद्दीन ने छल-कपट से हम्मीर के ! दो विश्वस्त मंत्रियों-रति पाल व रणमल को अपनी ओर मिला लिया ! जिन्होंने दुर्ग के गुप्त दरवाजे का भेद उसे बता दिया ! अलाउद्दीन के सैनिक गुप्त दरवाजे से अंदर पहुँच गये !

रानी रंगदेवी के साथ सभी रानियों व दुर्ग की स्त्रियों ने जौहर किया ! और सभी वीरों ने केसरिया किया ! राणा हम्मीर वीरगति प्राप्त हुआ ! 13 जुलाई, 1301 ई. को रणथम्भौर पर अलाउद्दीन का अधिकार हो गया !
रणथंभौर युद्ध में अलाउद्दीन ने दुर्ग के अंदर तक मार करने हेतु !

  • विशिष्ट चबूतरे –

गरगच, मगरबी ज्वलनशील पदार्थ फेंकने के यंत्र और अर्शदा पत्थरों की वर्षा करने वाला यंत्र थे ! सैन्य समाग्री खाना -पीने की सहायता से दुर्ग पर आक्रमण किया ! दुर्ग से शूरवीरों ने अग्निबाण फेंके व ढेकुली यंत्रों से दुश्मन पर पत्थरों के गोले बरसाये !

रणथम्भौर दुर्ग के आक्रमण Ranthambore fort attack

  • मेवाड़ महाराणा कुंभा एवं मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी के मध्य युद्ध –

रणथम्भौर दुर्ग 1398 में तैमूरलंग के आक्रमण के बाद दिल्ली की केन्द्रीय सत्ता के कमजोर हो जाने पर ! रणथंभौर दुर्ग पर अधिकार हेतु मेवाड़ महाराणा कुंभा एवं मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी के मध्य युद्ध हुआ ! जिसमें महाराणा कुंभा ने इस दुर्ग को जित लिया ! महाराणा सांगा ने यह दुर्ग अपनी हाड़ी रानी कर्मवती व उसके पुत्रों विक्रमादित्य व उदयसिंह को जागीर में सौंप दिया ! सन् 1533 ई. में गुजरात के शासक सुल्तान बहादुरशाह द्वारा चित्तौड़ पर आक्रमण करने पर राजमाता कर्मवती द्वारा संधि की गई ! एवं रणथंभौर दुर्ग बहादुरशाह को सौंप दिया गया ! 1542 ई. में अफगान बादशाह शेरशाह सूरी ने इस दुर्ग का दुर्गाध्यक्ष अपने पुत्र आदिलखाँ को बनाया ! बाद में यह किला बूंदी के हाड़ा शासक सुरजन हाड़ा के अधीन हो गया !

  • 1569 ई. में मुगल बादशाह अकबर ने दुर्ग पर आक्रमण किया –

1569 ई. में मुगल बादशाह अकबर की सेना ने दुर्ग पर आक्रमण किया ! परन्तु पूरी सफलता नहीं मिल पाई ! तब आमेर के शासक भगवन्त दास के प्रयासों से रणथंभौर दुर्ग के अधिपति ! बूंदी के शासक राव सुरजन हाड़ा अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली और दुर्ग अकबर को सौंप दिया गया ! अकबर ने रणथंभौर को अजमेर सूबे का एक सरकार(जिला) बना दिया !

रणथंभौर किले के बारे में About Ranthambore Fort-

मुगल साम्राज्य के पतन होने पर रणथंभौर दुर्ग जयपुर के शासक महाराज सवाई माधोसिंह प्रथम ! के विश्वस्त सामंत अनूपसिंह खंगारोत के प्रयासों से जयपुर रियासत के अधिकार में आ गया ! इसके बाद इसे प्राप्त करने हेतु मराठों एवं जयपुर के कछवाहा शासकों के मध्य अनेक लड़ाईयाँ हुई ! जिनमें काकोड़ का युद्ध प्रमुख है ! स्वतंत्रता प्राप्ति तक रणथंभौर दुर्ग पर जयपुर के कछवाहा शासकों का नियंत्रण कायम रहा ! रणथम्भौर दुर्ग अण्डाकृति वाली पहाड़ी पर बना हुआ है ! किले के पार्श्व में पद्मला तालाब स्थित है !

आज का रणथंभौर Today’s Ranthambore fort –

रणथम्भौर दुर्ग आज के समय में रणथंभौर देखने के लिए प्रसीद माना जाता है ! और अब इसे राजस्थान राज्य सरकार ने रणथम्भौर दुर्ग को 1955 में अभ्यारण घोषित कर दिया !

बाद में इसे 1 नवंबर 1980 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया यह राज्य का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान है ! और दूर – दूर दर्शक इसे देखने के लिये आते है!

प्रमुख दर्शनीय स्थल –

रणथम्भौर उद्यान देश के बेहतरीन बाघ आरक्षित क्षेत्र में से एक है ! इसमें प्रसिद्ध जोगी महल पदम तालाब व राज बाग स्थित है ! यहां खस घास पाई जाती है यहां अलग-अलग दो पर्वत श्रंखला है विद्याचल और अरावली पर्वतमाला मिलती है ! और दो नदियां चंबल में बनास क्षेत्र की सीमा से लगती है !
बरसने मंदिर चौथ माता का मंदिर रणथंबोर दुर्ग क्षेत्र में गुप्त गंगा और 32 स्तंभ की छतरी दर्शनीय स्थल है !


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