1857 की क्रांति (Indian Rebellion of 1857)

आज हम आपको इस पोस्ट में 1857 की क्रांति के बारे में विस्तरित जानकारी देंगे –

1857 की क्रान्ति की शुरुआत 29 मार्च 1857 में बैरकपुर छावनी से हुई थी। क्रांति के प्रचार प्रसार के लिए रोटी और कमल के फूल के प्रतिक का प्रयोग किया गया था।

1857 की क्रांति के प्रमुख बिंदु : – –

  • ब्रिटेन के प्रधानमंत्री – पार्मस्टन 
  • भारत के गवर्नर – जनरल लॉर्ड कैनिंग 
  • मुगल साम्राट बहादुर शाह II
  • विद्रोह दबाने के लिए नियुक्त सेनापति – कैम्पबेल
  • विद्रोह का प्रतीक – कमल, रोटी

1857 की क्रान्ति के मुख्य बिंदु :-

स्वरूप:-

अलग-अलग लोगों ने इस क्रांति को अलग अलग स्वरूप दिया। किसी ने सैनिक विद्रोह कहा तो किसी ने महान क्रांति का दर्जा दिया था।

मुख्य कारण :-

नई एनफील्ड राइफल में चर्बी युक्त कारतूसो का प्रयोग

अन्य कारण :-
  1. कंपनी का अकुशल व अत्याचारी प्रशासनिक तंत्र 
  2. डलहौजी की हड़प नीति के कारण देशी राजाओं में भय
  3. कंपनी की विस्तार वादी और साम्राज्यवादी नीति
  4. अवैध व अन्य कई राज्यों का ब्रिटिश राज्य में विलय
  5. भू राजस्व व्यवस्था के प्रति असंतोष 
  6. किसानों की खराब दशा नील व अन्य नगदी फसलें उगाने की मनमानी     
  7. अन्य धर्म अपनाने पर भी पैतृक संपत्ति में अधिकार
  8. सैनिकों की समुद्र पार देशों में जाने की अनिवार्यता

1857 की क्रांति

1857 क्रांति की शुरुआत :-

1857 की क्रान्ति की शुरुआत 29 मार्च 1857 में बैरकपुर छावनी से हुई थी। 34 वी नेटिव इन्फेंट्री रेजीमेंट के सैनिकों ने चर्बी युक्त कारतूसों का प्रयोग करने से इंकार कर दिया। 26 फरवरी को भी बंगाल में 9 वी नेटिव इन्फेंट्री ने विरोध किया था। क्रांति की शुरुआत होते ही मंगल पांडे ने अंग्रेज सार्जेंट हयूरसे और लेफ्टिनेंट बाघ को गोली मार दी।
1857 की क्रांति

क्रांति का प्रचार प्रसार :-

क्रांति के प्रचार प्रसार के लिए रोटी और कमल के फूल के प्रतिक का प्रयोग किया गया था।

महत्वपूर्ण तथ्य :- 

10 मई को मेरठ के सैनिकों ने खुला विद्रोह कर दिया और दिल्ली में बहादुर शाह जफर भारत का सम्राट घोषित कर दिया था।
बख्त खाँ को सेनिक नेतृत्व सौपा जहां जॉन निकल्सन व हडसन ने विद्रोह का दमन किया था।
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1857 की क्रांति का मोर्चा किसने कहां से संभाला था।

कानपुर :-

यहाँ 1857 की क्रांति का नेतृत्व पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब धुंधूपत ने किया था। इसी दौरान गोरिल्ला युद्ध भी लड़ा गया था।
कानपुर में इस विद्रोह का दमन जनरल हैवलॉक ने किया।

 लखनऊ :-

यहाँ 1857 की क्रांति का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने किया तथा अपने नाबालिक पूत्र विजरिस कादर को नवाब घोषित किया।
लखनऊ में विद्रोह का दमन कॉलिन केम्पवेल ने किया था।

बुंदेलखंड :-

यहाँ क्रांति का नेतृत्व झांसी के शासक गंगाधर राव की पत्नी लक्ष्मी बाई ने विद्रोह का नेतृत्व किया और तात्या टोपे की मदद सें  ग्वालियर पर अधिकार कर लिया था। बुंदेलखंड में विद्रोह का दमन जनरल ह्यूमरोज ने किया था।

इलाहाबाद :-

इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने नेतृत्व किया और दमन कर्नल नील ने किया था।

बरेली :-

बरेली का नेतृत्व खान बहादुर खाँ ने किया तथा स्वयं को रूहेलखंड का नवाब घोषित कर दिया। इसका दमन कॉलिंन कैंपवेल ने किया था।

अति आवश्यक तथ्य :-

20 सितंबर 1857 को अंग्रेजों ने दिल्ली पर वापिस अधिकार कर लिया और बहादुर शाह जफर को बंदी बनाकर रंगून भेज दिया था। 7 नवंबर 1862 को रंगून में बादशाह जफर की मृत्यु हो गई। 1857 की क्रांति एक असफल क्रांति थी। क्योंकि इसका पर्याप्त लोगों का नेतृत्व नही मिल पाया था। क्रांति को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की संज्ञा वी.डी. सावरकर ने दी थी।

FAQs on Indian Rebellion of 1857