trinetra ganesh ji त्रिनेत्र गणेशजी मंदिर रणथंम्भौर

नमस्कार दोस्तों आज हम राजस्थान के रणथंम्भौर में स्थित त्रिनेत्र गणेशजी मंदिर रणथंम्भौर ( trinetra ganesh ji ) के बारे में पूरी जानकारी देंगे

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  • निर्माण करवाया – महाराजा हमीरदेव चौहान
  • पुजा का दिन – बुधवार
  • स्थान– त्रिनेत्र गणेशजी का मंदिर प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व एरिया में (trinetra ganesh ji)
  • गणेशजी को आमंत्रण भेजने का पता – त्रिनेत्र गणेशजी का मंदिर रणथंम्भौर किला सवाईमाधोपुर ,राजस्थान भारत
  •  फोन नंबर -09414045263
  •   पिन कोड – (322001)
trinetra ganesh ji राजस्थान के सवाई माधोपुर में गणेशजी का यह चमत्कारी मंदिर हैं ! यहां पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा स्वयंभू प्रकट हुई थी. रणथम्भौर दुर्ग के अंदर त्रिनेत्र गणेश मंदिर कई बातों में अनूठा और चमत्कारिक मंदिर है ! ऐसा कहा जाता है कि यहां पहली त्रिनेत्र गणेश प्रतिमा के रुप में भगवान गणेश स्वयं विराजमान है ! भगवान गणेश मंदिर में अपने पूरे ही परिवार के साथ विराजमान है दो पत्नी- रिद्दि और सिद्दि और दो पुत्र- शुभ और लाभ के साथ भगवान गणेश जी विराजमान हैं !

trinetra ganesh ji त्रिनेत्र गणेशजी मंदिर की खास बात –

trinetra ganesh ji tample के बारे में सबसे अधिक खास बात यह है. की यहां देश और दुनिया से आने वाले पत्र कई जगहों से भक्त भगवान को पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताते हैं. और उनका हल भगवान चुटकियों में ही कर देते हैं और भगवान गणेश जी को भक्त निमंत्रण-आमंत्रण पत्र भी भेजते हैं ! भक्तों के घर परिवार में शुभ-मांगलिक कार्य होने पर भगवान त्रिनेत्र गणेशजी को सबसे पहले याद किया जाता है ! वह त्रिनेत्र गणेश मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पुरी होती है ! भगवान श्री गणेश जी को आमंत्रण भेजने के लिए मंदिर के नाम और पते त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथम्भौर दुर्ग, सवाई माधोपुर, राजस्थान के साथ पिन कोड नंबर 322021 लिखने पर इस मंदिर में पत्र पहुंच जाता है !
  • 10 किलो पत्र इस गणेश मंदिर में रोज आते हैं 
दूर दूर से लोग यहां अपने बेटे-बेटियों की शादी का पहला निमंत्रण त्रिनेत्र गणेशजी को देते हैं ! आजकल तो कार्ड छपने लग गए हैं. नहीं तो पुराने जमाने में उस समय के चलन के हिसाब से पीले चावल निमंत्रण के रूप में दिए जाते थे ! और यही नहीं उन्हें भगवान तक यह पत्र पहुंचाने के लिए 5 कि.मी. की दुर्गम चढाई पर चढना पड़ता था और. मजे की बात तो यह है ! कि इन पत्रों को पोस्ट्मैन (डाकिया) इस दुर्गम किले की ऊंचाई पर जंगली रास्तों से होता हुआ हमेशा पहुंचाता है !

सब पत्रों को पुजारी भगवान गणेशजी को पढकर सुनाता है –

मंदिर में पहुंचते ही पत्र हिंदी या अंग्रेजी में हो तो पुजारी जी उसे पढ़ कर गणेश जी को सुनाते हैं ! पर यदि किसी और भाषा में पत्र लिखा गया हो तो उसे खोल कर गणेश जी के सामने ही रख दिया जाता है ! कई लोग पत्रों द्वारा ही अपनी व्यथा भगवान trinetra ganesh ji को लिख कर भेजते हैं ! और कहते हैं कि गणेशजी उनकी व्यथा पत्र द्वारा सुनकर ही दूर कर देते हैं !
  • त्रिनेत्र श्रीगणेशजी का श्रृंगार –
रणथंम्भौर किले में भगवान त्रिनेत्र गणेशजी का श्रृंगार भी बहुत ही सुंदरता से किया जाता है ! trinetra ganesh ji का श्रृंगार सामान्य दिनों में तो चाँदी के वरक से ही किया जाता है  ! भगवान श्रीगणेश की झाँकी पर महाआरती मे किले में उगी घास की सफेद सीखियों को उपयोग में ली जाती है ! इन सीखियों पर रूई को लपेट कर और घी में डुबोकर आरती की जाती है !

trinetra ganesh ji Miracle त्रिनेत्र श्रीगणेशजी के चमत्कार –

त्रिनेत्र गणेश जी के मंदिर के बारे में रामायण में उल्लेख मिलता है रामायण काल और द्वापर युग में यह मंदिर था ! और ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री राम ने लंका की और कूच करते समय. भगवान त्रिनेत्र श्रीगणेश जी का अभिषेक इसी रुप में किया गया था ! श्री राम ने लंका पर शुगी्व की सेना के साथ युद्ध करने से सबसे पहले श्री गणेशजी की पूजा कि थी ! उस समय यह प्रतिमा रणथंम्भौर मैं स्थित हुई लेकिन अब विलुप्त भी हो गई ! ऐसा माना जाता है की जब द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का विवाह रूकमणी से हुआ ! तो भगवान कृष्ण गलती से ganesh ji  को बुलाना भूल गए !
इस कारण भगवान श्रीगणेश नाराज हो गए और अपने मूषक राजाओं को आदेश दिया. की विशाल चूहों की सेना के साथ जाओ और कृष्ण के रथ के आगे पुरी धरती पर ही बिल ही बिल खोद दो ! इसी कारण वंश भगवान कृष्ण का रथ धरती में धँस गया और आगे ही नहीं बढ़ पाए थे ! मूषकों के बताने पर भगवान श्रीकृष्ण को अपनी गलती का अहसास आखिर हो ही गया ! एव रणथंम्भौर में श्रीगणेश ( trinetra ganesh ji Temple Ranthambore) को लेने के लिए गए ! तब ही भगवान श्री का कृष्ण का विवाह सम्पन्न हुआ था ! उसी समय से गणेशजी को शुभ कार्यों में सबसे पहला न्यौता दिया जाता है !
  • रणथंम्भौर त्रिनेत्र गणेश को भारत का प्रथम गणेश कहा जाता है (Trinetra Ganesh ji Temple Ranthambore in hindi)

यही कारण है रहा है की रणथंम्भौर त्रिनेत्र गणेश को भारत का प्रथम गणेश कहा जाता है ! इस तरह की और भी कई सच्ची कहानियां इस मंदिर के बारे में आज भी कही और सुनी जाती है ! ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर( trinetra ganesh ji Temple) का भव्य निर्माण महाराजा हमीर देव चौहान ने कराया था ! हमीरदेव और अलाउद्दीन खिलजी के बीच में सन् 1299-1302 के मध्य रणथम्भौर में युद्ध हुआ था ! उस समय दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने किले को चारों और से घेर लिया था !
हालात ठीक होने के बजाए और भी बिगड़ते जा रहे थे हालत सुधर ही nhi रहे थे और इसी बीच ! महाराजा को भगवान त्रिनेत्र गणेश ने स्वप्न में आकर कहा कि मेरी पूजा करो सब की सब समस्याएं खत्म हो जाएंगी ! इसके दूसरे दिन किले की दीवार पर त्रिनेत्र गणेश की मूर्ति अंकित हो गई थी ! उसके बाद हमीरदेव ने भगवान श्रीगणेश द्वारा बताई जगह पर ही मंदिर बनवाया गया ! वह इसके बाद कई सालों तक चला और युद्ध भी समाप्त हो गया था !

त्रिनेत्र की मान्यता ( Ganesh ji mandir )

रणथंम्भौर में त्रिनेत्र गणेशजी दुनिया के एक मात्र गणेश है जो तीसरी आंख धारण करते है !”गजवंदनम् चितयम्” में विनायक के तीसरे नेत्र का वर्णन पुर्ण रुप विस्तृत तरीके से किया गया है ! ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र उत्तराधिकारी सौम पुत्र गणपति को सौंपा ! और इस तरह महादेव की सारी शक्तियाँ गजानन में समाहित हो गई थी ! महागणपति षोड्श स्त्रौतमाला में विनायक के सौलह विग्रह के स्वरूपों का वर्णन भी किया गया है ! महागणपति अत्यंत विशिष्ट और भव्य भी है जो त्रिनेत्र धारण करते है इस प्रकार माना जाता है ! कि रणथम्भौर के रणतभंवर महागणपति का साक्षात्कार स्वरूप है  ! trinetra ganesh ji

त्रिनेत्र गणेशजी मंदिर कैसे जाएं (How to reach Trinetra Ganeshji Temple)

त्रिनेत्र गणेशजी मंदिर, रणथम्भौर दुर्ग, सवाई माधोपुर, राजस्थान जाने के वास्ते सड़क मार्ग बहुत ही आसान रहा है ! सवाई माधोपुर से 13 किलोमीटर की दूरी पर ही (trinetra ganesh ji Temple) त्रिनेत्र गणेश का मंदिर है ! यह मंदिर विश्व धरोहर में शामिल रणथम्भौर दुर्ग के अंदर बना है ! यहां जाने के लिए रेल सेवा भी है और साथ ही यहां पर सड़क मार्ग से बस या निजी वाहन से जा सकते है ! हवाई सेवा का उपयोग करने के लिए नजदीक में एयरपोर्ट जयपुर है ! यहां से बस या निजी वाहन से भी जा सकते हैं !

गणेश मंदिर में पूजा आरती (pooja Aarti in Ganesh Temple) –

त्रिनेत्र श्रीगणेशजी के मंदिर में पुजारी द्वारा विधिवत् रूप से पूजा की जाती है ! और इसमें पुराणोंक्त तथा वेदोक्त दोनों प्रकार के मंत्रों को भी शामिल किया जाता है ! trinetra ganesh ji भगवान त्रिनेत्र गणेशजी  की हमेशा दिन में 5 आरती की जाती है !
  • सुबह 07:30 बजे
  •  सुबह 09:00 बजे वाली आरती को भगवान गणपति की श्रृंगार आरती कहा जाता है
  •  दोपहर 12:00 बजे इस को भोग आरती कहते है
  •  साम के समय की प्रार्थना 6 बजे के बाद होने वाली आरती
  •  अंतिम आरती रात को 08:00 बजे जिसको भगवान गणपति की शयन आरती भी कहा जाता हैं
   सुबह 04:00 बजे भगवान गणेशजी की मंगला आरती और 7:30 पर आरती, 9 बजे अभिषेक तथा श्रृंगार आरती 12:00 बजे भगवान गणेश की जन्मोत्सव की विशेष झाँकी और महाआरती तथि प्रसाद वितरण का समय ! शाम को आरती और रात्रि को भगवान के दरबार में रात्रि जागरण किया भी जाता है ! हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर त्रिनेत्र श्रीगणेशजी के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं की भीड़ ही भीड़ लगी रहती थी ! मिली जानकारी के अनुसार हर साल तीन लाख से अधिक. श्रद्धालु त्रिनेत्र श्रीगणेशजी (trinetra ganesh ji) के दर्शन के लिए आ जाते है !

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